उम्मीद की किरण इनसे…:ब्लास्ट में जवानों के पैर उड़े, हाथ टूटे, पर हौसला कायम

छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल इलाके में ड्यूटी कर रहे जवानों का जोश बढ़ा हुआ है, क्योंकि सालों की मेहनत का फल जवानों को मिल रहा है। बड़े नक्सली लीडर मारे जा रहे हैं। हालांकि जवानों को भी बड़ा नुकसान हुआ है। जवान शहीद हो रहे हैं और गंभीर रूप से घायल भी। कई जवानों ने आईईडी ब्लास्ट में पैर और हाथ तक गंवा दिए हैं, लेकिन उनका हौसला नहीं टूट रहा। आज भी वर्दी पहनकर, बंदूक लेकर रोज घर से निकल रहे हैं। इलाके में गश्त कर रहे हैं या फिर ऑफिस में बैठकर जिले का काम कर रहे हैं। ये जवान उन लोगों के लिए उम्मीद हैं, जो सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं कर रहे हैं। ऐसे ही जवानों की कहानियां… एक पैर, फिर भी रोज वर्दी में गश्त
दोरनापाल डीआरजी में पदस्थ माड़वी सुक्का 2011 में पुलिस में भर्ती हुए थे। तब नक्सलियों के भय से कोई भी फोर्स में नहीं आता था। पोस्टिंग के बाद लगातार नक्सलियों के कोर एरिया चिंतागुफा, चिंतानाल, जगरगुंडा इलाके में गश्त करते थे। 27 नवंबर 2018 को चिंतागुफा इलाके में ऑपरेशन पर निकले थे। मिनपा के पास नक्सलियों ने आईईडी लगाया था, जिसकी चपेट में आने से उनका एक पैर उड़ गया। अब कृत्रिम पैर से चल रहे हैं। आज भी वर्दी में दोरनापाल थाने में ड्यूटी कर रहे हैं। पैर उड़ा, डरे नहीं… डटे हैं ड्यूटी पर
सरकार के लिए अबूझ रहा नारायणपुर का अबूझमाड़ जहां कोई आज तक नहीं गया, वहां पिछले एक साल से फोर्स जा रही है। डीआरजी ने व​हां घुसकर नक्सलियों को मार गिराया है। इसी टीम में शामिल सिपाही राकेश यादव 21 फरवरी को छोटे डोंगर इलाके में गए थे। कड़ाईमेटा के पास आईईडी की चपेट में आ गए। उनका घुटने के नीचे का हिस्सा उड़ गया। पर हिम्मत नहीं हारी। आज भी ड्यूटी में हैं। गश्त में जाने को तैयार हैं। इलाके सेनक्सलियों का सफाया चाहते हैं। जख्मी होने पर भी नहीं छोड़ी बंदूक
नारायणपुर डीआरजी में पदस्थ सिपाही रामचंद यादव 2018 से नक्सलियों के खिलाफ जारी ऑपरेशन में शामिल हुए। 3 अक्टूबर 2024 को फोर्स के साथ रामचंद ऑपरेशन नेंदूर थुलथुली के लिए निकले थे। 4 अक्टूबर को नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। नक्सलियों ने फोर्स पर यूबीजीएल दागा। वह रामचंद के सामने ब्लास्ट हो गया। रामचंद दूर जा गिरे। उनकी जांघ, पैर व हाथ को नुकसान पहुंचा। फिर भी दो घंटे तक नक्सलियों पर फायरिंग करते रहे। ऑपरेशन में 31 नक्सली मारे गए थे। पैर खोने के बाद दोबारा मोर्चे पर
नारायणपुर के हवलदार घासीराम मांझी सर्चिंग के दौरान 20 दिसंबर 2024 को कच्चा पहाड़ के पास आईईडी की चपेट में आ गए। ब्लास्ट से कमर के नीचे का हिस्सा बुरी तरह जख्मी हो गया। अस्पताल में जब होश आया तो उनका एक पैर नहीं था। सदमे में आ गए, फिर भी खुद को संभाला। दो माह बाद वर्दी में ड्यूटी पर आ गए। नक्सल ऑपरेशन में शामिल हुए। घासीराम को याद नहीं है कि नक्सलियों से कितनी मुठभेड़ हुई हैं। 8 नक्सलियों को मारने की वजह से उन्हें प्रमोशन भी मिला है। ट्रेन से पैर कटा, रोज 40 किमी सफर रायपुर में पदस्थ सिपाही अभिषेक निर्मलकर का ट्रेन की चपेट में आने से एक पैर कट गया है। 2020 में अभिषेक एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) में पदस्थ थे। 17 जनवरी 2020 की शाम ड्यूटी से छूटकर वापस घर भिलाई जा रहे थे। दानापुर एक्सप्रेस में बैठे। सभी बोगी में भीड़ थी, इसलिए किसी तरह जनरल बोगी में चढ़ गए। वह गेट के पास खड़े थे। भिलाई-3 के आगे अचानक बोगी में धक्का-मुक्की हुई। अभिषेक खुद को संभाल नहीं पाए और नीचे गिर गए। ट्रेन के नीचे आ गए। जब अस्पताल में होश आया तो उनका एक पैर नहीं था। हादसे के बाद उसे ऑफिस काम के लिए पोस्टिंग दी गई। सरकार ने रायपुर में क्वार्टर भी दिया, ताकि अप-डाउन न करना पड़े। लेकिन बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी होने की वजह से आज भी रोज 40 किलोमीटर ट्रेन से अप-डाउन कर रहे हैं।

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