राजधानी रायपुर को बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुविधा देने में शहर सरकार विफल है। शहर सरकार की इस विफलता का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि 18 लाख की आबादी वाले शहर में केवल चार रूट पर ही सिटी बसें चल रही हैं। रायपुर रेलवे स्टेशन से अलग-अलग जगहों पर जाने के लिए उन्हें ढाई सौ से चार सौ रुपए तक खर्च करने पड़ जा रहे हैं। रायपुर रेलवे स्टेशन, कोटा, सेजबहार और एम्स आदि जगहों पर जाने के लिए सिटी बसें नहीं चलने से लोग परेशान हो रहे हैं। इसके लिए 250 से 400 रुपए ऑटों वाले ले रहे हैं। गौरतलब है कि रायपुर में सिटी बसें चलाने के लिए शहरी सार्वजनिक यातायात समिति का गठन किया गया है। समिति ने रायपुर रेलवे स्टेशन से अलग-अलग इलाकों के लिए करीब दर्जनभर रूट्स तय किए हैं। इनमें से रायपुर से मंदिरहसौद, धरसींवा, नवा रायपुर के कुछ इलाके, विधानसभा-खरोरा रूट्स पर ही बसें चल रही हैं। शहर के शेष इलाकों में किसी भी रूट पर सिटी बसों की आवाजाही ही नहीं है। इन इलाकों से आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन इलाकों के लोगों को हो रही ज्यादा परेशानी
{ रेलवे स्टेशन से कुम्हारी बस्ती, घड़ी चौक वाया कुम्हारी चौक। { रेलवे स्टेशन से माना एयरपोर्ट वाया घड़ी चौक, माना कैंप। { रेलवे स्टेशन से मंदिर हसौद, नवागांव, पलौद, कोटनी। { रेलवे स्टेशन से पंडरी बस स्टैंड, अवंति चौक, मोवा, जीरो पाइंट, विधानसभा, { दोंदे, खरोरा तिगड्डा। { रेलवे स्टेशन से फाफाडीह सिलियारी स्टेशन। { रेलवे स्टेशन से फाफाडीह, भनपुरी, उरला, कुम्हारी। { एयरपोर्ट से टाटीबंध चौक, यहां से भिलाई, दुर्ग बस स्टैंड { रेलवे स्टेशन से घड़ी चौक, मैग्नेटो माल, एमएम फन सिटी, भानसोज { रेलवे स्टेशन से घड़ी चौक, माना बस्ती, चंपारण। { रेलवे स्टेशन से तेलीबांधा, मंदिर हसौद, कुरुद, चंदखुरी { रेलवे स्टेशन से धरसींवा, खैरखुंट, सुंगेरा { रेलवे स्टेशन से नवा रायपुर मंत्रालय, संचालनालय वाया जोरा { रेलवे स्टेशन से नवा रायपुर मंत्रालय, संचालनालय वाया माना बस्ती चौक, नगर घड़ी, पचपेड़ी नाका, टाटीबंध { एयरपोर्ट से तेलीबांधा चौक, कुम्हारी, चरौदा, भिलाई-3, पावर हाउस, नेहरू नगर, दुर्ग बस तक स्टैंड (एसी बस) { रेलवे स्टेशन से पंडरी बस स्टैंड, विधानसभा, मांढर, सिलियारी।{ रेलवे स्टेशन से भाठागांव बस स्टैंड स्टेशन से बोरियाखुर्द जाने का भाड़ा 300 रुपए
दुर्ग से रायपुर आए चौहान परिवार रेलवे स्टेशन से बोरियाखुर्द जाना था। परिवार ने रेलवे स्टेशन के बस स्टॉप जाकर सिटी बस की जानकारी ली तो उन्हें बताया गया कि इस रूट में बस नहीं चल रही है। उन्होंने वहां आॅटो-रिक्शा वालों से बात की तो भाड़ा 300 रुपए बताया गया। स्टेशन से बाहर निकलकर उन्होंने ई-रिक्शा वालों से बात की। एक ई-रिक्शा वाला ढाई सौ रुपए में ले जाने को तैयार हुआ।
जानिए, क्या कहते हैं लोग ^एम्स में इलाज करवाने के लिए आया हूं। रिश्तेदार के घर चरोदा जाना है। जो गाड़ी आ रही है, उसमें जगह नहीं है। आदमी जब नहीं चढ़ पा रहा है तो मैं मरीज के साथ कैसे चढ़ सकता हूं।
ईश्वरेंद्र ठाकुर ^ अभी मुझे कुम्हारी से रायपुर आना पड़ा। आटो वाले ने 300 रुपए लिए। सिटी बसें जब चलती थी तब हम 20-25 रुपए में रायपुर शहर पहुंच जाते थे।
संगीता सिंह, कुम्हारी ^ सेजबहार में तेजी से बसाहट बढ़ रही है। सैकड़ों प्राइवेट और सरकारी कॉलोनियां हैं, लेकिन इस रूट पर एक भी सिटी बस नहीं चल रही है। शेयरिंग पर आॅटो लेना पड़ता है।
चंदा कुशवाहा, सेजबहार सीधी बात – मनीष जैन, सिटी बस ऑपरेटर कोरोना के बाद 67 में से 36 बसें ही चलने लायक दर्जनभर से ज्यादा रूट हैं, लेकिन दो-तीन में ही बसें चल रही हैं, क्यों?
-36 बसें चालू स्थिति में हैं। कुछ स्पेयर में रखना पड़ता है।
बाकी रूट में क्यों नहीं चलाई जा रही हैं बसें?
-कोरोना के बाद जितनी बसें चलने लायक थीं, उनकी मरम्मत के बाद उन्हें चलाया गया। इतनी कम बसों में सभी रूट पर बसें चलाना मुश्किल है।
सिटी बसें नहीं चलने से ऑटो वाले मनमाना किया वसूल रहे हैं?
-ऑटो वालों की मनमानी है। बस ड्राइवर और कंडक्टर से झगड़ा और मारपीट करते हैं। उन्हें रोकना चाहिए।


