बालोद जिले में युवा किसान गोविंदा कुमार (33) दूसरे किसानों के लिए बड़ी मिसाल बने हैं। उन्होंने निजी कम्पनी में फील्ड ऑफिसर की नौकरी छोड़ कर खेत किराए पर लिया और खेती की राह पकड़ी। शुरू के वर्षों में उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा लेकिन हार नहीं मानी। वर्तमान में गोविंदा 32 एकड़ खेत के मालिक हैं और 45 लोगों को रोजगार दे रहे हैं। गोविंदा कुमार ने बताया- मैं साजा में निजी कंपनी में फील्ड अफसर था। तब 2016-17 के दौरान मैंने देखा कि हरियाणा, गुजरात और अन्य राज्यों के किसान यहां धान के बजाय दूसरी फसलों की खेती कर रहे हैं। इस पर मैंने उन किसानों से जैविक खेती के बारे में पूरी जानकारी ली, नई तकनीकें सीखी। मैंने सोचा कि जब दूसरे राज्य के किसान छत्तीसगढ़ आकर अलग-अलग फसलों की खेती कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं कर सकता? मैंने हिम्मत कर अपना घर गिरवरी रख दिया और बैंक से 10 लाख रुपए का लोन लिया। इसके बाद 3 एकड़ रेगहा (किराया) की जमीन ली और जिले में पहली बार खरबूज की खेती की। वर्ष 2017 से 2019 तक आय से ज्यादा तो खर्च हो गया और 2020 में कोरोना के कारण नुकसान हुआ। लेकिन पीछे हटने के बजाय जैविक खेती जारी रखी। खेती का रकबा 12 एकड़ बढ़ाकर खरबूज, कलिंदर, पपीता लगाया। धीरे-धीरे आय अच्छी होने लगी तो खुद की जमीन ली। आज मेरे पास खुद की 32 एकड़ जमीन है, जिसमें धान को छोड़कर बाकी कई फसलें उगा रहा हूं। मेरे प्रयासों को सफल होते देखकर जिले में लगभग 100 से ज्यादा किसान जैविक खेती करने लगे हैं। किसान गोविंदा ने बताया- तीन-चार राज्यों के किसानों से जो तकनीकें सीखी, वे बहुत काम आईं। साथ ही पानी बचाने के लिए टपक सिंचाई पद्धति का उपयोग किया। इस पद्धति में भूजल से निकल रहे 70 प्रतिशत पानी की बचत हुई। अभी खेत में मिर्च, केला, पपीता, टमाटर, नारियल, कटहल आदि की खेती कर रहा हूं। खेती से 45 लोगों को रोजाना रोजगार मिल रहा है। कर्रेगांव और झीटिया में ढाई एकड़ जमीन में नारियल के 700 पौधे भी लगाए हैं। केला, मिर्च, टमाटर, नारियल की फसल की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से करता हूं।


