अमृतसर जिले में सावन माह की शुरुआत के साथ पहले सोमवार को मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। शिवजी के प्रिय महीने सावन के महीने के पहले सोमवार को सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई। अमृतसर के महीने में प्राचीन मंदिरों में शाम के समय खास श्रृंगार किया जाता है। माता पार्वती ने की थी तपस्या शिव पुराण के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए सावन माह में कठोर तपस्या की थी। उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और उनकी मनोकामना पूर्ण की। घटना के कारण सावन माह को भक्ति और तपस्या का महीना माना जाता है। इस महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। बेलपत्र पर लिखा राम का नाम मान्यता है कि जो लोग पूरे साल सोमवार का व्रत नहीं रख पाते, वे सावन के सोमवार का व्रत रखते हैं। इसका फल पूरे साल के सोमवार व्रत के बराबर माना जाता है। मंदिरों में भक्त बेलपत्र पर राम नाम लिखकर शिवलिंग पर चढ़ा रहे हैं। मंदिर में आने वाले सभी श्रद्धालुओं को बेलपत्र दिए जा रहे हैं। भक्तों का कहना है कि भगवान शिव उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। कुंवारी कन्याओं ने भी किया पूजन इस माह में कुंवारी कन्याएं भी सोमवार का व्रत रखती हैं। वे गौरी माता की पूजा करती हैं। उनकी मान्यता है कि इससे उन्हें अच्छा वर मिलेगा। सावन माह की शुरुआत को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह है। कुछ भक्त इसकी शुरुआत पूर्णिमा से मानते हैं, जबकि कुछ संक्रांति से। जहां भी शिवलिंग स्थापित है, वहां भक्त पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। प्राचीन मंदिरों में खास श्रृंगार सावन के महीने में प्राचीन मंदिरों में सोमवार को विशेष श्रृंगार किया जाता है। शिवाला वीरभान, शिवाला बाग भाइयों सहित कई मंदिरों में टन के हिसाब फूल और फलों से भगवान शिव का श्रृंगार होता है। सावन का महीना अमृतसर में विशेष रूप से मशहूर है। अमृतसर के दुर्गियाना मंदिर में सावन के रविवार को नव विवाहित महिलाएं अपने पति के साथ फूलों का विशेष श्रृंगार करके पूजा अर्चना करती हैं।


