बेकाबू प्रदूषण:इंदौर के पास तीन गांवों में ईंट-भट्ठों के कारण हर तीसरे घर में बीमारियां; गले में दर्द, फेफड़ों व आंखों में संक्रमण हो रहा

कुमेड़ी, भानगढ़ व भांग्या से लगे रहवासी क्षेत्रों के हर दूसरे–तीसरे घर में कोई न कोई बीमार है। ज्यादातर लोगों के गले में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, घुटन, फेफड़ों में इन्फेक्शन, आंखों में जलन और पानी आने की परेशानी है। सबकी वजह सिर्फ वायु प्रदूषण है। गुरुवार को जब एक्सपर्ट के साथ भास्कर टीम क्षेत्र में पहुंची तो धूल और धुएं के बीच सांस लेना मुश्किल था। यहां ईंट भट्ठे के साथ ही बड़ी मात्रा में कचरे को जलाया जा रहा है। भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद गुरुवार को मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम वहां पहुंची। क्षेत्रीय अधिकारी एसएन द्विवेदी ने बताया, भांग्या के कचरा स्टेशन और कुमेड़ी के आसपास की 24 घंटे की एयर मॉनिटरिंग करवा रहे हैं। उद्योगों की भी जांच की है। क्षेत्रीय सरपंच और जिला पंचायत विभाग को सूचना दी है। लगातार नोटिस के बाद भी चल रहे ईंट भट्ठे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 8 दिसंबर को 25 और 15 दिसंबर 7 ईंट भट्ठे बंद करने के आदेश दिए थे, पर ज्यादातर अभी भी बेरोकटोक चल रहे हैं। कचरा स्टेशन पर भांग्या के अलावा बारोली और मगरखेड़ा पंचायतों का कचरा भी डंप हो रहा है। भांग्या के सरपंच मामराज जायसवाल कहते हैं, बाउंड्रीवाल नहीं होने से असामाजिक तत्व ही वहां आग लगा देते हैं। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. सलील भार्गव , श्वसन एवं क्षय रोग विशेषज्ञ जहरीली गैसों से हो रहीं गंभीर बीमारियां रबर, प्लास्टिक, कोयला, लकड़ी, मरे मवेशियों के अवशेष सहित अन्य कचरे को जलाया जा रहा है। इनसे निकले धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रस ऑक्साइड सहित अन्य जहरीली गैस हैं। लगातार संपर्क में रहने से फेफड़ों का कैंसर और सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) जैसी बीमारी हो सकती है। खांसी चलना, सांस फूलना, आंखों में जलन-आंसू, बलगम निकलना, शरीर में खुजली होना तो प्रारंभिक लक्षण हैं।

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