सावन के पावन महीने में बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। हर कोई अपनी श्रद्धा और आस्था के साथ बाबा पर जल चढ़ाने पहुंच रहा है। इसी बीच उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से आए एक नेत्रहीन कांवरिया की आस्था की कहानी सबके लिए प्रेरणा बन गई है। आजमगढ़ निवासी मनोज ने नेत्रहीन होने के बावजूद कांवर यात्रा पूरी कर यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची आस्था किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती। एक सड़क दुर्घटना में अपनी दोनों आंखें गंवाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। सावन के पहले सोमवार को उन्होंने सुल्तानगंज से गंगाजल उठाया और 108 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा कर पांचवें दिन बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचे। मैं देख नहीं सकता पर आस्था भरपूर है मनोज का कहना है कि मैं भले ही आंखों से नहीं देख सकता, लेकिन मेरी आत्मा हर पल बाबा को देखती है। उनकी कृपा से ही यह यात्रा पूरी कर सका। रास्ते में उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन बाबा के प्रति अटूट विश्वास और लोगों की मदद से वे अपनी मंजिल तक पहुंचे। उनकी यह यात्रा अन्य कांवरियों और श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। बाबा धाम पहुंचने पर कई श्रद्धालुओं ने उनकी हिम्मत और भक्ति को नमन किया। मनोज ने गंगाजल से बाबा का जलाभिषेक कर अपने जीवन की सबसे बड़ी कामना पूरी होने की बात कही।


