मुंबई में ड्राईफ्रूट-मिठाई का लाखों का बिजनेस छोड़ बने किसान:सिर्फ खीरे से 15 लाख से ज्यादा कमाई; चार एक्सपर्ट किसानों को दी नौकरी

पाली के छोटे-से गांव नाडोल के 60 साल के किसान जगदीश सीरवी ने 9 साल पहले मुंबई में जमा-जमाया मिठाई का बिजनेस छोड़ा और खेती शुरू की। उन्होंने खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। ग्रीन हाउस लगाकर वे खीरे समेत कई सब्जियों और फसलों का उत्पादन ले रहे हैं। रिटायरमेंट की उम्र में वे खेती से लाखों की कमाई कर रहे हैं। मुंबई के पनवेल में उनका मिठाई और ड्राई फ्रूट का बिजनेस था, जिसे वे कारीगरों के हवाले कर आए। बेटा एडवोकेट है और मुंबई में परिवार के साथ सेटल हो गया है। बेटी की शादी भी मुंबई में ही कर जगदीश जिम्मेदारियों से मुक्त हो गए थे। उनकी इच्छा थी कि गांव जाकर वे खेती करें। जगदीश सीरवी की नाडोल में 35 बीघा जमीन है। यहां वे खीरा, मिर्च, बैंगन, गोभी और चना का उत्पादन कर रहे हैं। साढ़े चार बीघा में 2 ग्रीन हाउस हैं। तीसरे ग्रीन हाउस का काम चल रहा है। साढ़े पांच बीघा में फार्म पौंड है। उन्होंने सैलरी पर 4 कर्मचारी रखे हैं। जगदीश पत्नी के साथ खेत में बने एक बीघा के बड़े मकान में रहते हैं। म्हारे देस की खेती में आज बात पाली के किसान जगदीश सीरवी की… मजबूरी में परदेस गए, बिजनेस जमाया किसान जगदीश सीरवी ने बताया- मेरा गांव नाडोल पाली शहर से 55 किमी दूर है। नाडोल में रानी रोड पर 35 बीघा में खेत हैं। खेत में ही मकान है। साढ़े 4 बीघा में 2 ग्रीन हाउस हैं। वर्तमान में इनमें खीरे की खेती हो रही है। इसके अलावा खुले खेत में अन्य सब्जियां व चने की खेती हो रही है। मेरे पिता मानाराम सीरवी भी खेती करते थे। जब मैं 16-17 साल का था, तब गांव में खेती के अलावा रोजगार के दूसरे साधन नहीं थे। उस समय कमाने के लिए परदेस (दूसरे राज्य) जाने का चलन था। मैंने भी 10वीं पास की और 1980 में काम की तलाश में मुंबई चला गया। वहां कपड़े की दुकान पर काम किया। मिठाई की दुकान पर काम किया। मिठाई बनानी सीखी। 1987 में मुंबई के पनवेल में एक दुकान किराए पर ली और मिठाई-ड्राई फ्रूट का छोटा बिजनेस शुरू किया। काम चल निकला तो दुकान खरीद ली। सालाना 25-30 लाख का टर्नओवर होने लगा। इस दौरान बेटा अपने पैरों पर खड़ा हो गया और बेटी की शादी कर दी। मेरा पैतृक घर, जमीन, रिश्तेदार दोस्त सब नाडोल (पाली) में ही थे। इसलिए लौटकर नाडोल में ही बसने का विचार आया। 2010 में गांव में डेयरी प्लांट खोला, फेल हुआ किसान जगदीश सीरवी ने बताया- मुंबई से मैं नाडोल आता-जाता रहता था। 2010 में कुछ दिन के लिए नाडोल आया और यहां डेयरी प्लांट शुरू किया। सोचा था कि मिठाई की दुकान के लिए गांव से मावा तैयार कर मुंबई ले जाऊंगा। 150 भैंस खरीदी। बायो गैस प्लांट लगाया। लेकिन, मुंबई तक मावा पहुंचाने का खर्च ज्यादा था। मुंबई रहकर भैंसों की देखरेख और डेयरी प्लांट संभालना मुश्किल था। ऐसे में 2013 में डेयरी प्लांट को बंद कर दिया। 2015 में मिठाई का बिजनेस कारीगर को सौंप कर गांव आया किसान जगदीश सीरवी ने बताया- 2015 में मिठाई की दुकान कारीगर को किराए पर दे दी। दुकान का नाम नहीं बदला। किराया और रॉयल्टी तय कर मैं मुंबई से नाडोल आ गया। अब मेरा विचार खेती-किसानी करने का था। गांव में 35 बीघा जमीन थी। इस पर पहले से खेती होती थी। मैं आधुनिक तकनीक से नवाचार करते हुए खेती करना चाहता था। ऐसे में नई खेती को लेकर रिसर्च करने लगा। उन दिनों आधुनिक किसान ग्रीन हाउस और पॉली हाउस लगाकर सब्जियों की खेती कर रहे थे। ग्रीन हाउस लगाकर खीरे की खेती शुरू की, अब 3 ग्रीन हाउस मैंने ग्रीन हाउस तकनीक से इजराइली खेती के बारे में सुना था। ग्रीन हाउस देखने के लिए मैं भीलवाड़ा और जोधपुर तक गया। भीलवाड़ा से एक्सपर्ट किसान को सैलरी देकर नाडोल बुलाया और ग्रीन हाउस लगाने में मदद मांगी। किसान की मदद से और 40 लाख की लागत लगाकर मैंने ग्रीन हाउस सेटअप लगाया और खीरे की खेती की। मुझे इस खेती से इतना फायदा हुआ कि 6 साल बाद 2021 में मैंने दूसरा ग्रीन हाउस लगाया। इसमें भी मैंने खीरे की खेती को आगे बढ़ाया। खेती बाड़ी में मदद के लिए 4 एक्सपर्ट किसानों को परमानेंट सैलरी पर रखा है। चारों को 10 से 12 हजार रुपए मंथली सैलरी दे रहा हूं। खीरे की तुड़ाई के लिए अलग से दिहाड़ी मजदूर रखता हूं। अब 5 बीघा में लग रहा तीसरे ग्रीन हाउस का सेटअप वर्तमान में 5 बीघा में तीसरे ग्रीन हाउस का सेटअप लग रहा है। यह अगले साल तक पूरा हो जाएगा। दोनों ग्रीन हाउस से सीजन में 30 लाख का खीरा हो जाता है। इसे बेचकर 15 से 16 लाख की इनकम सीजन में हो जाती है। इसके अलावा अन्य खेतों में मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल करता हूं। दोनों ग्रीन हाउस को ड्रिप इरिगेशन तकनीक से जोड़ रखा है। खीरे के अलावा खेतों में मिर्च, गोभी और बैंगन की खेती होती है। लगातार बढ़ रहा सब्जियों को प्रोडक्शन किसान जगदीश ने बताया- दो ग्रीन हाउस से 150 टन तक खीरा हो जाता है। सिर्फ खीरे से सीजन में 15 लाख तक कमाई हो जाती है। अन्य सब्जियों और गेहूं-चना से अतिरिक्त आय होती है। खीरे की फसल साल में दो बार होती है। गर्मी के सीजन में 35 से 40 दिन में फसल पक कर तैयार होती है। सर्दी में डेढ़ महीने में फसल तैयार हो जाती है। ज्यादातर खीरा पाली सब्जी मंडी में जाता है। जोधपुर मंडी तक भी माल जाता है। फसल लेकर जाने का खर्च मैं ही वहन करता हूं। खीरे का भाव अभी 30 रुपए किलो तक जा रहा है। अन्य सब्जियां नाडोल मंडी में ही खप जाती हैं। तीसरे ग्रीन हाउस बनने के बाद सालाना 25 लाख की कमाई होने का अनुमान है। फसलों में मैं देसी खाद का इस्तेमाल करता हूं। सब्सिडी लेकर 5 बीघा में लगाया फार्म पौंड किसान जगदीश ने बताया- खेत में पहले से कुआं था। उसमें बोरवेल लगवा लिया। पानी की कोई दिक्कत नहीं है। सरकारी स्कीम से फार्म पौंड के बारे में पता चला तो कुछ साल पहले 5 बीघा के खेत में फार्म पौंड खुदवाया। फार्म पौंड में बारिश का पानी इकट्‌ठा होता है। बारिश के पानी से सिंचाई करने का यह फायदा मिला है कि सब्जियों की क्वालिटी और स्वाद में सुधार हुआ है। बारिश के पानी से सब्जियों को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। इनकी गुणवत्ता बढ़ती है। किराया और रॉयल्टी से हर माह 1.5 लाख कमाई किसान जगदीश सीरवी ने बताया- मुंबई के पनवेल में स्थित मिठाई की दुकान को मैंने बेचा नहीं। बल्कि, दुकान पर काम करने वाले कारीगर को किराए पर दी है। कारीगर दुकान का नाम इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में किराया और रॉयल्टी मिलाकर डेढ़ लाख रुपए प्रतिमाह किराया आ रहा है। नाडोल मैं और पत्नी आरती (55) खेती संभालते हैं। बेटा मुंबई में एडवोकेट है। वह परिवार के साथ पनवेल में रहता है। दामाद की मुंबई में मेडिकल शॉप है। यह भी पढ़ें राजस्थान का मिर्ची वाला गांव, हर किसान परिवार लखपति:80 साल से नहीं बदला ट्रेंड, देशभर में हैं यहां की चिली की डिमांड बांसवाड़ा जिले का एक गांव अपनी मिर्ची के लिए देशभर में पहचान रखता है। यहां की मिर्चियों का तीखापन खाने के स्वाद को और बढ़ा देता है। इसलिए दूसरे राज्यों से भी खरीददार यहां आते हैं। फाइव स्टार होटल्स, रेस्टोरेंट के शेफ भी यहां की मिर्ची को खासा पसंद करते हैं। हम बात कर रहे हैं मसोटिया मिर्च की। (पढ़ें पूरी खबर)

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