सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे छात्र – छात्राओं के खेलने के लिए राज्य सरकार ने 40 करोड़ रुपए की स्पोर्ट्स किट सप्लाई की है। यह किट उन स्कूलों को भी सप्लाई कर दी गई जहां स्टूडेंट्स के खेलने के लिए प्ले ग्राउंड, वास्केटवॉल ग्राउंड ही नहीं है। संसद में पेश एक रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 11 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में खेल मैदान नहीं हैं। वहीं दूसरी ओर स्कूलों को सप्लाई हुई स्पोर्ट्स किट में भेजा गया सामान उपयोग के बिना ही खराब होने लगा है। यह दैनिक भास्कर की स्कूलों में स्पोर्ट्स एक्टिविटी की इनवेस्टीगेशन में हुआ है। समग्र शिक्षा संचालनालय ने राज्य के प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी लेवल तक के 48,261 स्कूलों में स्पोर्टस एक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए स्पोर्ट्स किट की सप्लाई की है। इन किट्स को सरकार ने 40 करोड़ रुपए में खरीदा है। पड़ताल में खुलासा हुआ है कि स्कूलों को सप्लाई हुई किट क्वालिटी के मानकों पर खरी नहीं हैं। स्पोर्ट्स किट के आइटम सिलेक्शन में पीटीआई से डिमांड लेनी थी …रायपुर, दुर्ग और धमतरी के अलग – अलग स्कूलों में पदस्थ फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर (पीटीआई) ने भास्कर संवाददाता के सवाल – क्या 9वीं से 12वीं क्लास तक के बच्चे कंचा, लट्टू , पिट्टुल और गिल्ली – डंडा से खेलेंगे? के जबाव में कहा – बिल्कुल नहीं। साथ ही स्पोर्ट्स किट पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या स्टूडेंट्स कंचा, लट्टु, पिट्टुल, गिल्ली डंडे से खेलकर, ,स्पोर्ट्स में करियर बनाएंगे। पीटीआई का कहना था कि किट की खरीदी से पहले सरकार को मटेरियल चयन में शिक्षकों से राय लेनी चाहिए थी। ताकि सभी स्कूलों को स्टूडेंट्स के पसंदीदा खेल की किट मिलती। हरीश देवांगन, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ
जब से शासन ने सेंट्रलाइज्ड खरीदी करना शुरू किया है, तब से क्वालिटी मानकों पर नहीं है, साथ ही गैर जरूरी सामानों की खरीदी हो रही है। स्पोर्ट्स किट किस स्तर की है, इसकी निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है। 2 रिपोर्टर, 21 दिनों की पड़ताल… हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल के बड़े बच्चों को स्पोर्ट्स किट में कंचा, लट्टू और पिट्ठूल दिए रिपोर्टर की आंखों देखी दो शॉट में शटल कॉक टूटी , क्रिकेट बैट खराब हुआ, … फुटबॉल की सिलाई उधड़ी रायपुर की पुरानी बस्ती में संचालित एक स्कूल में स्टूडेंट्स के खेलने के लिए क्रिकेट की किट खोली गई, तो उसमें बैट ही खराब निकला। वहीं एक अन्य स्कूल में बेडमिंटन किट में आई शटल कॉक दो शॉट में ही टूट गई। इसी तरह दुर्ग के एक सरकारी स्कूल में छात्र फु टबाल खेलते मिले। पूछने पर स्टूडेंट्स ने बताया कि फुटबॉल की सिलाई उधड़ (खुल) गई है। इतना ही नहीं छात्रों ने बताया कि उन्हें फुटबॉल एक नंबर छोटी दी गई है। टग ऑफ वॉर रोप (रस्साकसी) लंबाई में छोटी है, मोटाई कम है। इसी स्कूल में मानकों वाली रोप भी मिली जो साइज और ग्रिपिंग में मानकों पर थी।
स्पोर्ट्स किट की नहीं खुली पैकिंग
राजधानी रायपुर में पुरानीबस्ती, डीडी नगर, मोवा और फाफाडीह के प्राइमरी से हायर सेकेंडरी तक के स्कूलों में प्ले ग्राउंड नहीं है। नतीतजन यहां संचालित स्कूलों काे सप्लाई हुई स्पोर्ट्स किट की पैकिंग ही टीचर्स ने नहीं खोली है। … खेलने के लिए ब्लॉक करते हैं सड़क
: आरडी तिवारी स्कूल खो-खो पारा, पुरानी बस्ती- रायपुर का खो-खो पारा स्कूल पहली से 12वीं तक है। स्कूल में जगह कम है इसलिए प्राइमरी और मिडिल की कक्षाएं एक साथ, एक समय पर लगती हैं। जबकि हाईस्कूल की क्लास अलग समय पर। यहां खेल मैदान के लिए इतनी ही जगह है जितने में छात्र खड़े होकर प्रेयर कर सकें। यही वजह है कि सिर्फ इंडोर गेम होते हैं। खेल मैदान के अभाव में सालाना खेल प्रतियोगिताएं सड़क को ब्लॉक करके करवाई जाती हैं। विभाग के जिम्मेदार अफसर
1. सिद्धार्थ कोमल सिंह परेदसी, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग
2. ऋतुराज रघुवंशी, संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय
3. संजीव झा, प्रबंध संचालक समग्र शिक्षा। किट क्रय समिति के जिम्मेदार अफसर
1. के. कुमार, अतिरिक्त प्रबंध संचालक
2. दिनेश कौशिक, उप संचालक
3. शैलेंद्र वर्मा, एमआईएस प्रभारी ,
4. धीरज नशीने, पूर्व वित्त नियंत्रक
(टेंडर डॉक्यूमेंट में समग्र के इन अधिकारियों के साइन।) स्कूल की स्पोर्ट्स किट में क्या-क्या 1. प्राइमरी स्कूल स्पोर्ट्स किट (पहली से पांचवी): स्कूलों की संख्या- 30,477 | कुल आइटम- 13
स्पोर्ट्स किट पर खर्च- 15.23 करोड़ रुपए।
{क्रिकेट बैट्स- 2 पीस { टेनिस बॉल सेट- 4 पीस {1 सेट {गिल्ली डंडा- 5 गिल्ली- 2 सेट
{वॉलीबॉल- 1 पीस { फ्लाइंग डिस्क- 2 पीस
{ चेस बोर्ड बिथ लूडो- 1 सेट { स्किपिंग रोप- 2 पीस { कांचा (50)- 1 सेट {लट्टू- 2 पीस { पिट्टुल- 2 सेट। रिंग थ्रो गेम- 2 सेट { कैरम बोर्ड- 1 सेट (गोटी, स्ट्रकर, पॉउडर) और डर्ट गेम- 1 सेट।
2. अपर प्राइमरी स्पोर्ट्स किट (6वीं से 8वीं)- स्कूलों की संख्या- 13093 | कुल आइटम- 17
स्पोर्ट्स किट पर खर्च- 13.09 करोड़ रुपए।
3. हाई और हायर सेकंडरी स्पोर्ट्स किट (9वीं से 12वीं)- स्कूलों की संख्या- 4691 |आइटम- 27 स्पोर्ट्स किट पर खर्च- 11.72 करोड़ रुपए। टीम भेजकर वेरीफिकेशन करवाता हूं…
^आपने जो भी कमियां बताई हैं, टीम भेजकर उन सभी का वेरीफिकेशन करवा लेता हूं। जहां से भी सामग्री में गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही हैं, उन्हें रिप्लेस करवा रहे हैं। छात्र अगर, कंचा, लट्टु, पिट्टुल, गिल्ली डंडा नहीं खेल रहे हैं, तो समीक्षा करेंगे। – संजीव झा, प्रबंध संचालक, समग्र शिक्षा … पीटीआई का मिडिल स्कूलों में सेटअप ही नहीं प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में स्पोर्ट्स (खेल) नहीं है। यही वजह है कि बीते 24 सालों में कई सरकारें बदलीं लेकिन प्रायमरी और मिडिल स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर/पीटीआई का प्रावधान किसी ने नहीं किया। हाई स्कूल के सेटअप में पीटीआई (व्यायाम शिक्षक) हैं, लेकिन 4691 में से सिर्फ 1151 स्कूलों में। 2541 पद खाली हैं। अधिकांश प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में सप्लाई हो रहीं स्पोर्ट्स किट अलमारियों में बंद हैं, क्योंकि इन्हें खिलाने वाला कोई नहीं है। प्राचार्य जिन शिक्षकों को खेल का प्रभार देते हैं, वे पढ़ाएं की खेल करवाएं। हालांकि इस सत्र से न्यू एजुकेशन पॉलिसी के चलते स्पोर्ट्स पीरियड अनिवार्य कर दिया गया है। भास्कर एक्सपर्ट – अखिलेश दुबे, खेल विशेषज्ञ
कंचा, लट्टु, पिट्टुल, गिल्ली-डंडा खिलाकर फिजिकल ग्रोथ नहीं कर सकते। बच्चों की खेल के प्रति रूचि के आधार पर स्पोर्ट्स किट दें।
जवाहरसुरी सेट्टी, शिक्षाविद्
एनसीईआरटी, खेल को लेकर जो सिलेबस तैयार कर रहा है, वो 2026 से लागू होगा। स्कूलों में पीटीआई का न होना छात्रों के साथ क्राइम है।


