मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में हसदेव नदी पर बना अमृतधारा जलप्रपात बारिश के मौसम में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह छत्तीसगढ़ के प्रमुख जलप्रपातों में से एक है। जिसके मनोरम रूप को देखने पर्यटक यहां साल भर पहुंचते हैं। लेकिन जलप्रपात में कोई सुरक्षा नहीं होने के कारण कई लोगों की जान जा चुके हैं। पुलिस केंद्र में ताला लटका हुआ है। जिला प्रशासन ने सालों पहले जलप्रपात के किनारे रेलिंग लगाई थी। जो कि टूट चुकी है। जिससे खतरा बना रहता है। नीचे झरने के पास जाने के कारण कई हादसे भी हो चुके हैं। लोग यहां नहाने के दौरान गहरे पानी मे डूब जाते हैं। जिससे उनकी मौत हो जाती है। यहां अब तक कई मौतें हो चुकी हैं। इसके बावजूद लोग जलप्रपात के पास जाते हैं।सुरक्षा की दृष्टि से यहां पुलिस सहायता केंद्र बना हुआ है। लेकिन जिले में पुलिस बल की कमी के कारण पुलिस सहायता केंद्र में ताला लटका रहता है। कोटवार सहित 6 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है मामले में नागपुर हाईवे चौकी प्रभारी शेष नारायण सिंह ने बताया कि पुलिस बल की कमी है। इसके बाद भी हम अमृतधारा जलप्रपात का पेट्रोलिंग करते हैं। लोगों को झरने के पास और नीचे न जाने की समझाइश देते हैं। बरसात को देखते हुए यहां ग्राम पंचायत सचिव, गांव के कोटवार सहित 6 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। भारी बरसात को देखते यहां बेरिकेडिंग की जा रही है। ताकि लोग झरने के पास न जाएं। सुरक्षा का कोई उपाय नहीं मध्य प्रदेश से आए टूरिस्ट रोहित ने बताया कि यहां का नजारा बहुत सुंदर है। लेकिन सुरक्षा का कोई उपाय नहीं है। प्रशासन को चारों ओर रेलिंग कराना चाहिए। ताकि लोग सुरक्षित होकर झरने का नजारा देख सकें। कैसे पहुंचे अमृतधारा यहां पहुंचने के लिए मनेंद्रगढ़ से अंबिकापुर को जाने वाले नेशनल हाईवे तिरालिस में स्तिथ लाई नामक जगह से जाया जा सकता है। लाई मुख्य मार्ग से जलप्रपात की दूरी 8 किलोमीटर है। जहां तक पहुंचने के लिए सड़क बनी हुई है। 100 फिट ऊंचाई से अमृतधारा गिरती है। जिसे देखने छत्तीसगढ़ के कई जिलों के अलावा पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के पर्यटक भी पहुंचते हैं। यहां भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर भी है। पर्यटक दर्शन के लिए जाते हैं। हसदेव नदी जो कोरिया जिले के मेंड्रा इलाके से निकली है और पहाड़ी इलाकों से होते हुए सुरम्य वादियों के बीच जलप्रपात का निर्माण करती है।


