छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सड़कों की बदहाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए पीडब्ल्यूडी के अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है। डिवीजन बेंच ने कहा कि सरकार इतना पैसा दे रही है। फिर भी सड़कों की गुणवत्ता क्यों ठीक नहीं है..? आप टेंडर करते हैं, काम कराते हैं और साल भर में बनी सड़कें उखड़ने लगती है। दरअसल, बीते दिनों बिलासपुर जिले के तखतपुर की 2 करोड़ की सड़क की बदहाली, पहली बारिश में दरारें आई और मल्हार की मुख्य सड़क के गड्ढों में तब्दील होने को लेकर मीडिया में खबरें आई थीं। इसमें बताया गया कि खराब सड़कों के कारण आवाजाही में लोगों को किस तरह से परेशानी हो रही है। इसके साथ ही शहर की सड़कों पर गड्ढों और पानी भरने जैसी समस्याओं पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन और नगर निगम आयुक्त से जवाब मांगा था। महाधिवक्ता का जवाब- शासन ने मंजूर कर ली है 64 करोड़
बुधवार को इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच में हुई। इस दौरान महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत ने बताया कि मुंगेली और तखतपुर को जोड़ने वाली जर्जर मनियारी पुल की मरम्मत के लिए 64 करोड़ की राशि शासन ने मंजूर कर ली है। इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सड़क और पुल बनाने के लिए सरकार इतना पैसा दे रही है, फिर भी गुणवत्ता ठीक क्यों नहीं रहती। जिस पर तर्क दिया कि प्राधिकरण सड़क के रखरखाव के लिए उचित कदम उठा रहे हैं। वहीं, निगम सड़कों के रखरखाव के लिए उचित कदम उठाएगा। इस दौरान छत्तीसगढ़ सरकार के संबंधित सचिवों ने व्यक्तिगत शपथपत्र भी कोर्ट में जमा किए। कोर्ट ने अगली सुनवाई से पहले कार्य प्रगति पर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद केस की अगली सुनवाई सितंबर में तय की गई है। पुल पार करने से डरते हैं लोग
बता दें कि तखतपुर-बरेला मनियारी नदी पर अंग्रेजी शासनकाल में बने पुल की हालत जर्जर हो गई है, जिस पर लोगों का चलना मुश्किल है। मुंगेली-बिलासपुर दो जिले को जोड़ने वाले इस पुल पर सड़क कम गड्ढे ज्यादा नजर आ रहे हैं। पुल पर प्रतिदिन सैकड़ों वाहन का आना-जाना होता है। जर्जर पुल से सुरक्षित पार होने तक लोगों की सांसें मानों थमीं रहती है। बारिश में सड़क पर पानी जमा होने से परेशानी और भी बढ़ जाती है।


