चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र के हेसातू गांव में वज्रपात से घायल महिला को परिवार वालों और ग्रामीणों ने गोबर में लपेटकर घंटों तक जीवित करने की कोशिश की, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, गांव के बिलेश्वर भुइयां की 56 वर्षीय पत्नी उगनी देवी अपने आठ माह के पोते को गोद में लेकर घर के बाहर बैठी थीं। इस दौरान बारिश के साथ वज्रपात हुआ और दोनों उसकी चपेट में आ गए। घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने बच्चे को बाइक से निजी अस्पताल भेज दिया, लेकिन साधन के अभाव में घायल महिला को गोबर में लपेटकर रखा गया। ग्रामीणों का मानना था कि इससे वह जीवित हो सकती है। डेढ़ घंटे बाद पहुंचा एंबुलेंस मिली जानकारी के मुताबिक करीब डेढ़ घंटे बाद जब एंबुलेंस गांव पहुंचा, तब तक उगनी देवी की मौत हो चुकी थी। इसके बाद एंबुलेंस बिना मरीज को लिए लौट गई। इस दर्दनाक घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, घटना ने गांव में फैले अंधविश्वास और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर कर दिया है। फिलहाल वज्रपात में घायल आठ माह के पोते का अस्पताल में इलाज जारी है। उसकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है। घटना के बाद गांव में घटना को लेकर शोक और चर्चा का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।


