छत्तीसगढ़ में तेज बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं। कवर्धा जिले के रानीदहरा जलप्रपात में देखने आए 5 पर्यटक बह गए, जिसमें से एक की मौत हो गई, जबकि एक अभी भी लापता है। तीन को बचाया गया है। रेस्क्यू अभियान जारी है। मृतक की पहचान मुंगेली के दाऊपारा के नरेंद्र सिंह पाल (45) के रूप में की गई है। वहीं मुंगेली के ही सृजल पाठक अभी लापता है। पुलिया पार करते वक्त हादसा हुआ है। वहीं बालोद जिले में तेज बारिश से बाढ़ के हालत हैं। नदी में मवेशी के बहने का वीडियो आया है। रविवार को हुई भारी बारिश से दल्ली राजहरा में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। खासकर वार्ड क्रमांक 04, 20, 22, 23, 24, सब्जी मंडी और चिखलाकसा के निचली दफाई इलाके में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नाले के तेज बहाव में एक गाय बह गई। दल्ली राजहरा से अंतागढ़ जाने वाला रेलवे ट्रैक जलभराव के कारण डूब गया है। छत्तीसगढ़ के बस्तर, रायपुर और दुर्ग संभाग के जिलों में रविवार को तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस तरह राजनांदगांव, महासमुंद, गरियाबंद, कोंडागांव, कांकेर समेत 17 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। प्रदेश के दक्षिणी और उत्तरी हिस्से में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ी है। इन हिस्सों के कई स्थानों पर शनिवार दोपहर बाद मौसम बदला, और इसके बाद से ही अच्छी बारिश हो रही है। राजधानी रायपुर का में यही हाल रहा। रविवार सुबह से कई इलाकों में जमकर बारिश हुई। बिजली के चपेट में आने से युवक की मौत रायपुर में शनिवार को बिजली गिरने से एक युवक की मौत हो गई, जबकि दो घायल हैं। तीनों युवक छत पर गेम खेलने बैठे थे। इसी दौरान अचानक बिजली गिरी। घायलों का इलाज जारी है। घटना खम्हारडीह के भावना नगर की है। पिछले 24 घंटे की बात करें शुक्रवार को सबसे अधिक टेंपरेचर 35 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव और सबसे कम न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस पेंड्रा रोड में दर्ज किया गया। राज्य में अब तक 422 मिमी बारिश, सबसे कम बेमेतरा में छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 422.0 मि.मी. औसत बारिश दर्ज की जा चुकी है। प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सबसे ज्यादा 719.3 मि.मी. वर्षा दर्ज की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 229.9 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है। जिलेवार बात करें तो रायपुर संभाग में रायपुर जिले में 411.2 मि.मी., बलौदाबाजार में 426.2 मि.मी., गरियाबंद में 348.8 मि.मी., महासमुंद में 385.9 मि.मी. और धमतरी में 337.3 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर संभाग में बिलासपुर जिले में 452.8 मि.मी., मुंगेली में 468.7 मि.मी., रायगढ़ में 556.5 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 542.3 मि.मी., कोरबा में 504.0 मि.मी., गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 428.7 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 412.3 मि.मी., सक्ती में 479.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। दुर्ग संभाग में दुर्ग जिले में 343.3 मि.मी., कबीरधाम में 306.8 मि.मी., राजनांदगांव में 344.7 मि.मी., बालोद में 401.8 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 501.2 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 290.8 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 336.3 मि.मी., सूरजपुर में 559.3 मि.मी., जशपुर में 533.8 मि.मी., कोरिया में 521.1 मि.मी. और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 483.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बस्तर संभाग में बस्तर जिले में 459.2 मि.मी., कोंडागांव में 280.6 मि.मी., नारायणपुर में 320.8 मि.मी., बीजापुर में 475.5 मि.मी., सुकमा में 269.6 मि.मी., कांकेर में 378.9 मि.मी., दंतेवाड़ा में 416.1 मि.मी. और औसत बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। बारिश की तस्वीरें देखिए- बारिश के बाद झरनों की सुंदरता तस्वीरों में देखिए लंबा रह सकता है मानसून मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है। अगर इस साल अपने नियमित समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी। इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ


