नवा रायपुर स्थित सेंध और झांझ लेक में भारी अनियमितताओं और प्रतिबंधित निर्माण कार्यों को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैंड प्राधिकरण ने बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने रायपुर कलेक्टर, जो कि जिला वेटलैंड संरक्षण समिति के अध्यक्ष हैं, को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 19 के तहत सक्षम न्यायालय में औपचारिक शिकायत दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। वेटलैंड प्राधिकरण ने कहा है कि झांझ और सेंध जलाशयों में पाथवे, चौपाटी, निर्माण आदि गतिविधियां वेटलैंड नियमों के तहत प्रतिबंधित और दंडनीय हैं। ये कार्य न केवल पर्यावरण के लिए घातक हैं बल्कि जलाशय पर आश्रित जीवों के लिए भी खतरा हैं। क्या कहती है जांच रिपोर्ट? नियमों की अनदेखी की? सामाजिक कार्यकर्ता और ENT विशेषज्ञ डॉ. राकेश गुप्ता ने खुलासा किया कि जुलाई 2023 में जांच दल द्वारा कार्य रोकने के बावजूद मार्च 2024 में 15.34 करोड़ का नया कार्यादेश जारी कर निर्माण पूरे कराए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कलेक्टर ने जांच रिपोर्ट दबाकर मई 2025 में प्राधिकरण को भेजी, जिससे समय रहते कार्रवाई नहीं हो सकी। और भी तालाबों की रिपोर्ट दबाई गई? डॉ. गुप्ता ने आरोप लगाया कि रायपुर के बूढ़ा तालाब, महाराजबंद, तेलीबांधा सहित अन्य तालाबों की जांच रिपोर्ट अब तक वेटलैंड प्राधिकरण को नहीं भेजी गई। अगर ईमानदारी से जांच हो, तो कई निगम आयुक्त और जोन कमिश्नर मुश्किल में पड़ सकते हैं।। वेटलैंड मित्र और पुनर्स्थापन की मांग डॉ. गुप्ता ने बताया कि जून 2025 में रायपुर में वेटलैंड कार्यशाला आयोजित कर उन्होंने जनजागरूकता बढ़ाई। उन्होंने शासन से मांग की है कि सभी जलाशयों को उनकी पूर्व प्राकृतिक स्थिति में वापस लाया जाए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। 5 साल की सजा या जुर्माना पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अनुसार, दोष सिद्ध होने पर 5 साल की सजा या ₹1 लाख तक का जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। बताया जा रहा है कि नया रायपुर विकास प्राधिकरण (Nava Raipur Atal Nagar Vikas Pradhikaran) ने सेंध और झांझ जलाशयों में नियमों को दरकिनार कर करोड़ों रुपये के सौंदर्यीकरण और निर्माण कार्य कराए हैं।


