रांची सदर अस्पताल ने खुद को इस तरह डेवलप किया है कि दूसरे राज्य भी अब इससे सीख लेने की चाह रखने लगे हैं। ताकि रांची सदर अस्पताल से सीख कर वे इसे अपने राज्य के जिला अस्पतालों में भी लागू कर सकें। सदर अस्पताल में निरंतर बढ़ रहे संसाधन और सुविधाओं के कारण इसकी चर्चा देश भर में होने लगी है। तेजी से संसाधन बढ़ाने के मामले में रांची सदर अस्पताल पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। ऐसे में अब उत्तरप्रदेश सरकार ने इच्छा जताई है कि रांची की टीम वहां जाकर प्रेजेंटेशन दे कि कैसे इस व्यवस्था को यूपी में भी लागू किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि उत्तरप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने पत्राचार कर वहां प्रेजेंटेशन देने का आग्रह किया है। ताकि रांची सदर अस्पताल के डेवलपमेंट मॉडल को उत्तरप्रदेश में भी लागू किया जाए। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और रांची सदर अस्पताल की टीम को 25 जुलाई को उत्तरप्रदेश भेजा जा रहा है। सदर अस्पताल को इसे लेकर प्रजेंटेशन तैयार करने का भी निर्देश दिया जा चुका है। डॉक्टर बहाल किए, आयुष्मान के पैसों से उपकरण भी खरीदे सदर अस्पताल ने आयुष्मान से मिलने वाली क्लेम राशि का खर्च न केवल चिकित्सक नियुक्त करने में की, बल्कि इन पैसों से संसाधान भी बढ़ाए हैं। आयुष्मान के पैसों से अस्पताल में बेड बढ़ाए गए। करीब 10 से ज्यादा सुपर स्पेशियलिटी विभाग संचालित किए। रेडियोलॉजी सेंटर से लेकर कई बड़े-बड़े उपकरण भी खरीदे हैं। आयुष्मान से कैसे यह संभव हो सका? सदर अस्पताल ने किस तरह इतनी सुविधा बढ़ाई है, इस पर उत्तरप्रदेश में प्रस्तुति दी जाएगी। सदर अस्पताल रांची देश का पहला, जो प्राइवेट डॉक्टरों से ले रहा सेवा… अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि रांची का सदर अस्पताल देश का पहला जिला अस्पताल है, जिसने प्राइवेट डॉक्टरों से सरकारी अस्पताल में सेवा ली है। पहली बार आयुष्मान योजना के तहत प्राइवेट डॉक्टरों के साथ करीब एक साल पहले एमओयू किया गया था। इसके बाद से अब तक करीब दो दर्जन से ज्यादा स्पेशियलिस्ट प्राइवेट डॉक्टर सरकारी सदर अस्पताल में अपनी सेवा दे रहे हैं। आयुष्मान के तहत तैयार की गई एसओपी के अनुसार, इन डॉक्टरों को प्रति मरीज 400 से 800 रुपए तक भुगतान किया जा रहा है। जबकि सर्जरी योग्य रोगियों को आयुष्मान से उक्त केस के बदले मिलने वाली क्लेम राशि से 38% तक राशि का भुगतान किया जा रहा है।


