कांग्रेस की आर्थिक नाकेबंदी और उसके आरोपों के पलटवार में भाजपा ने नई परिभाषा दे दी है। उसने राहुल गांधी के बाद अब भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को कांग्रेस का नया शहजादा बताया है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि जब मंत्री कवासी लखमा पकड़े गए थे तब कोई नाकेबंदी नहीं हुई। लेकिन, अब शहजादे को पकड़ा गया है तो पूरी कांग्रेस आर्थिक नाकेबंदी करने में जुट गई है। साव ने कहा पहली बार ऐसा हुआ है कि भ्रष्टाचारियों के पक्ष में नाकेबंदी करके निर्दोष जनता को सजा देने का षड्यंत्र रचा गया। जनता का धन्यवाद कि इसे विफल कर दिया। ईडी ने आईने की तरह साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से अर्जित 3200 करोड़ रुपए से अधिक की आपराधिक आय (पीओसी) लाभार्थियों की जेबों में गई। चैतन्य बघेल को 16.7 करोड़ रुपए की पीओसी मिली। चैतन्य ने यह पैसे अपनी रियल एस्टेट फर्मों में लगाए। यही नहीं शहजादे ने शराब घोटाले के 1000 करोड़ रुपए से अधिक की पीओसी खुद संभाली। वे छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष को पीओसी हस्तांतरित करने के लिए अनवर ढेबर और अन्य के साथ समन्वय भी करते थे। यह आश्चर्यजनक है कि भूपेश अपने बेटे की गिरफ्तारी पर कह रहे हैं कि अगर उसके दादा आज जीवित होते तो खुश होते। अनेक बार अन्याय का विरोध करते हुए वे जेल गए थे। हम सभी जानते हैं कि हिंदुत्व का विरोध कर जेल जाते रहे। अब भूपेश का मुखौटा उतर गया है। भूपेश बघेल के आरोपों के जवाब में भाजपा ने दस्तावेज जारी किया। कहा कि पूरा खेल तो कांग्रेस शासनकाल में रचा गया है। पहले 19 अप्रैल 2022 को केंद्र से स्टेज-1 के लिए वन स्वीकृति मांगी थी। इसके बाद 23 जनवरी 2023 को केंद्र को पत्र लिखकर स्टेज-2 के लिए वन स्वीकृति की सिफारिश की। यानी भूपेश ने सीएम रहते हुए पेड़ काटने की अनुमति खुद दी थी। 2010 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हसदेव अरण्य को पूरी तरह से नो-गो-क्षेत्र घोषित किया था। यानी वहां खनन नहीं हो सकता। उसके बाद कांग्रेस के ही मंत्री जयराम 23 जून 2011 को तारा परसा ईस्ट और कांटे बसन कोल ब्लॉक खोलने का प्रस्ताव भेजा। भूपेश सरकार के समय 9 खदानों को पर्यावरण स्वीकृति दी गई। भाजपा ने भूपेश और अडानी के रिश्ते लाए सामने


