वसी अहमद खान|डंडई बरसात शुरू होते ही आकाशीय बिजली से मौत का सिलसिला शुरू हो गया है। आए दिन आकाशीय बिजली गिरने का खतरा मंडराता रहता है। इधर डंडई प्रखंड के सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं पर भी बरसात के मौसम में आसमानी बिजली का खतरा मंडरा रहा है। विद्यालय में कभी भी किसी स्कूल में वज्रपात से बड़ी घटना घट सकती है। इधर स्कूलों में वज्रपात कि घटनाओं से बचने के लिए लगाए गए तड़ित चालक या तो खराब हो गए या चोरी हो गए। फिलहाल स्कूलों में तड़ित चालक नहीं होने से प्रखंड भर के सरकारी विद्यालय में अध्ययनरत लगभग 16 हजार नौनिहालों कि जान खतरे में है। गैर सरकारी स्कूलों को मिला दें तो नौनिहालों का यह आंकड़ा और भी बढ़ जाता है। रविवार को छोड़कर प्रत्येक दिन बच्चे सुबह 9 बजे से लेकर शाम 3 बजे तक विद्यालय में रहते हैं। ऐसे में किसी तरह के आपदा से विद्यालय को सुरक्षित रखना जरूरी है। आकाशीय बिजली गिरने की अवस्था में उसे रोकने का एक मात्र उपाय तड़ित चालक है। लेकिन 12 वर्ष पहले प्रखंड के कुछ विद्यालयों में लगाए गए तड़ित चालक का नामोनिशान भी नहीं बचा है। प्रखंड में फिलहाल 71 स्कूल संचालित हो रहे हैं व ऐसे में बरसात में वज्रपात को लेकर बच्चों कि सुरक्षा भगवान भरोसे है। अगर कोई अनहोनी हुई तो उसका जिम्मेवार कौन होगा। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार प्रति स्कूल लगभग 32 हजार रूपए कि लागत से वर्ष 2008 से 2010 के बीच तड़ित चालक लगाने का कार्य किया गया था। बाद में वर्ष 2011 व 2012 में स्कूल भवन निर्माण के प्राक्कलन में ही इसकी राशि जोड़ दी गई थी। उस समय मात्र 20 विद्यालयों में तड़ित चालक लगवाने का कार्य किया गया था। इधर शिक्षा विभाग के अधिकतर पदाधिकारी का कहना कि विद्यालय में तड़ित चालक उनके कार्यकाल में नहीं लगाया गया है इसलिए उसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है। वहीं शिक्षा विभाग के कनीय अभियंता से बात करने कि कोशिश की गई लेकिन बात नहीं हो पाई। मामले में डीईओ कैशर रजा ने बताया कि ताड़ित चालक लगवाने के लिए अलग से आवंटन नहीं आया है। शिक्षकों को विद्यालय विकास कि राशि से ताड़ित चालक लगवाने का निर्देश दिया गया है। 20 विद्यालयों में लगे तड़ित चालक चोरी हो गए या खराब हो गए इधर लगभग 20 विद्यालयों में लगाए गए तड़ित चालक या तो चोरी हो गए या खराब हो गए। इधर अभिभावकों का कहना है कि 12 वर्ष बाद जबकि किसी स्कूल में तड़ित चालक नहीं बचा है तो विभाग इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रहा है। विभाग दोबारा तड़ित चालक लगवाने की पहल क्यों नही कर रहा है। इधर 12 वर्ष बाद कई सरकारी स्कूल अपग्रेड हो गए और विद्यालय का भवन जहां 1 मंजिला था दो मंजिला हो गया। गौरतलब रहे कि आसमानी बिजली अक्सर ऊंची इमारतों पर ही गिरती है लेकिन विभाग का इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं जा रहा है। प्रखंड कि भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां अक्सर वज्रपात की घटनाएं होती रहती है।


