पंजाब के लुधियाना में गुरुवार को एक फोटोग्राफर ने कमरे में बंद होकर सुसाइड कर लिया। काफी देर तक उसका कमरा नहीं खुला तो वह पड़ोसियों ने खिड़की से अंदर झांक कर देखा तो फोटोग्राफर का शव छत से फंदे से लटका हुआ था। जिस वक्त यह घटनाक्रम हुआ, उस वक्त मृतक घर में अकेला था। पड़ोसियों ने फोन कर मृतक के बेटे और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बेटे की मौजूदगी में कमरे का दरवाजा तोड़कर फोटोग्राफर का शव अंदर से निकाला। पुलिस को मौके से मृतक के मोबाइल से एक वीडियो मिला है, जिसे सुसाइड से पहले बनाया गया था। करीब 5 मिनट के इस वीडियो में फोटोग्राफर ने सुसाइड के लिए पुत्रवधू और उसके पिता को जिम्मेदार ठहराया है। कहा है कि- मेरी मौत के लिए पुत्रवधू और उसका पिता जिम्मेदार है। फिलहाल, पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। मृतक का मोबाइल भी कब्जे में ले लिया गया है। पुलिस ने मृतक के परिजनों के बयान भी दर्ज किए है। वीडियो में फोटोग्राफर ने क्या-क्या कहा… मृतक की पहचान विपन कुमार निवासी शिमलापुरी है। मोबाइल में मिले वीडियो में विपन ने कहा- मेरा बेटा गौरव सोफत की हिमांशी नाम के लड़की के साथ कुछ महीने पहले शादी हुई है। हिमांशी और उसके पिता राजिंदर कुमार ने हमें बहुत परेशान किया हुआ है। हमारा जीना मुश्किल हो चुका है। यहां से हिमांशी को मैंने खुद गाड़ी करके दी और वह अपने मायके चली गई। कुछ दिन बाद मेरा बेटा गौरव उसे लेने के लिए उसके घर गया लेकिन उन्होंने उसे धमकियां देते हुए घर से वापस लौटा दिया। ससुराल पक्ष वालों ने मेरे बेटे गौरव से कहा कि तुम्हारे परिवार को मिनटों में उठवा देंगे। मैं अपने बेटे के साथ फिर हिमांशी को लेने के लिए गया था लेकिन उसके पिता और उसने हमें घर से निकाल दिया और बेइज्जत किया। हमने शादी के समय कोई दहेज नहीं लिया। किसी तरह के कोई दहेज की डिमांड भी नहीं रखी। ये लोग हमें बहुत परेशान करते है। इतना कुछ होने के बावजूद मेरे बच्चे गौरव, विक्की, सुमिता और मेरी बेटी अमन। इन्हें भी वही धमकियां देकर लौटा दिया। मेरे बेटे को फोन पर धमकियां आती है। मैं इतना परेशान हो गया हूं। मेरे बेटे और मेरे परिवार की कानून और सरकार से मांग है कि हमारी रक्षा की जाए। यदि हमें कुछ होता है तो हिमांशी और उसका पिता राजिंद्र कुमार बजाज जिम्मेवार होंगे। पंजाब सरकार इनकी जांच करवाए। हमने कोई वस्तु उनसे नहीं ली। हिमांशी को जो भी मैंने गहना और करीब 60 हजार रुपए अलमारी में रखे थे वो भी पैसे वह अपने साथ ले गई। 4 से 5 दिन हिमांशी का फोन आता रहा लेकिन उनके बाद उसने फोन उठाना भी बंद कर दिया था। मैं आज इनसे परेशान होकर अपनी बेइज्जती महसूस करके आत्महत्या करने लगा हूं। मेरी आत्महत्या के जिम्मेवार हिमांशी और उसका पिता राजिंद्र बजाज है। कानून से मांग है कि मेरे बेटे की जान-माल की रक्षा की जाए।


