पावरकॉम में एक बड़ा बिजली कनेक्शन घोटाला सामने आया है। लुधियाना के अग्र नगर डिवीजन में बिना सरकारी फीस जमा किए बिजली मीटर कनेक्शन जारी कर दिए गए हैं। सूत्र बता रहे हैं कि ऐसे 300 से ज्यादा कनेक्शन बांट दिए गए हैं। घोटाला तब सामने आया जब कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें एक साल से बिजली का बिल नहीं आया। जांच में पता चला कि इनका कनेक्शन सिस्टम में तो दर्ज है, लेकिन विभाग के खाते में न तो सिक्योरिटी फीस आई है और न ही कोई रिकॉर्ड है। अवैध बिजली कनेक्शन एक निजी कंपनी के कर्मचारी ने जारी किए। इस कर्मचारी ने पावरकॉम के सॉफ्टवेयर में तकनीकी छेड़छाड़ की और सरकारी अधिकारियों की आईडी का दुरुपयोग कर कनेक्शन जारी कर दिए। दैनिक भास्कर ने जब जांच की तो पता चला कि जिन उपभोक्ताओं को अवैध कनेक्शन दिए गए, उनसे मोटी रकम वसूली गई थी। इस घोटाले में सरकारी और निजी कर्मचारी दोनों की ही मिलीभगत सामने आई है। अब अंदेशा है कि शहर के आउटर इलाकों में भी ऐसे कई कनेक्शन जारी किए गए हैं। इस पर भी जांच शुरू हो चुकी है। जल्द ही इस पर भी खुलासे होंगे। अवैध कॉलोनियों में लगे मीटर, आरोपी फरार कनेक्शन तीन कॉलोनियों में दिए गए हैं। यशस्वी होम्स, बसंत नगर और हैबोवाल। इन कॉलोनियों में उपभोक्ताओं से बात करने पर पता चला कि कुछ को छह महीने पहले तो कुछ को एक साल पहले कनेक्शन दिया गया था। लेकिन, आज तक एक बार भी बिजली का बिल नहीं आया। जिन कर्मचारियों पर घोटाले का शक है, वे इस समय छुट्टी पर चले गए हैं। कुछ का मोबाइल फोन भी बंद है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, आरोपी प्राइवेट कर्मी अब लुधियाना में नहीं हैं। उनकी लोकेशन पता करने के लिए विभाग ने इंटरनल ट्रैकिंग शुरू की है। चीफ इंजीनियर का कहना है कि जल्द ही एफआईआर होगी और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई होगी। अलग-अलग जेई की आई़डी से एंट्री की अग्र नगर डिवीजन में यह घोटाला काफी सोच-समझकर किया गया। पावरकॉम में नए बिजली कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है। इसके लिए सैप (SAP) नामक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होता है। हर नए कनेक्शन के लिए संबंधित जेई (जूनियर इंजीनियर) की आईडी जरूरी होती है। लेकिन विभाग ने निजी कंपनी के कर्मचारियों को खुद की आईडी देने की बजाय सरकारी कर्मचारियों की आईडी का उपयोग करने की छूट दे दी। सुविधा केंद्र में तैनात एक निजी कर्मचारी ने इसी का फायदा उठाया। उसने अलग-अलग जेई की आईडी से सॉफ्टवेयर में एंट्री की। फिर बिना किसी सिक्योरिटी फीस और चार्ज के सीधे बिजली कनेक्शन जारी कर दिए। ऐसे हुआ घोटाला… निजी कर्मियों ने सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया गड़बड़ी पहले भी हो चुकी: सरकारी आईडी का गलत इस्तेमाल दोबारा उसी तरह हुआ जैसा पहले हुआ था। एक पुराने मामले में एफआईआर के बाद ही सुधार हुआ था, लेकिन इस बार भी तब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई जब तक मामला खुलकर सामने नहीं आया। इससे पहले सुंदर नगर डिवीजन में भी इससे मिलती-जुलती धोखाधड़ी हो चुकी है। तब एक निजी कर्मचारी ने बाउंस चेक की एंट्री सॉफ्टवेयर से हटाकर लाखों रुपए खुद रख लिए थे। सिस्टम में कनेक्शन दिख रहा: सॉफ्टवेयर में इस तरह एंट्री की गई कि सिस्टम में कनेक्शन दिखे, लेकिन सरकारी खाते में उसकी कोई ट्रांजेक्शन न हो। यह घोटाला कई महीनों से चल रहा था। उपभोक्ताओं को जब एक साल तक बिजली बिल नहीं मिला, तब शक हुआ। इसके बाद जब विभाग ने कनेक्शन की जांच की, तो सच्चाई सामने आई। सिस्टम की सबसे बड़ी खामी यह रही कि निजी कंपनी के कर्मचारियों को बिना किसी ट्रैकिंग के सरकारी आईडी का एक्सेस मिल गया।


