हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच छत्तीसगढ़ में हिन्दू संगठन ने ओम सर्टिफिकेशन’ अभियान लॉन्च किया है। रायपुर में धर्मसिंधु श्रद्धा फाउंडेशन की ओर से हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओम सर्टिफिकेशन के अध्यक्ष और वीर सावरकर के पोते रणजीत सावरकर ने मीडिया से चर्चा की। रणजीत सावरकर ने कहा कि, 50 साल पहले हलाल सर्टिफिकेशन सिर्फ मांसाहार तक सीमित था, लेकिन आज यह हर क्षेत्र में लागू कर दिया गया है। देश में हिंदुओं की आबादी बहुमत में है, तो हम हलाल सर्टिफिकेशन वाले फूड क्यों खाएं? यह हमारी आस्था और धर्म के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हिंदू व्यवसायियों और ग्राहकों को एकजुट करने और पूरी तरह हिंदू परंपराओं के अनुसार पवित्र वस्तुएं उपलब्ध कराने के लिए ‘ओम सर्टिफिकेशन’ अभियान शुरू किया गया है। हलाल सर्टिफिकेशन का बहिष्कार करें- सुनील सुनील घनवट ने आरोप लगाया कि, हलाल सर्टिफिकेशन के जरिए एक समानांतर अर्थव्यवस्था चलाई जा रही है। हलाल सर्टिफिकेशन देने वाली पांच मुस्लिम एजेंसियां हैं। इनमें जमीयत उलेमा-ए-हिंद भी शामिल है, जो 700 से ज्यादा आतंकवादियों के मुकदमे लड़ रही है। हलाल उत्पादों का बहिष्कार करना जरूरी है। इसलिए लिया बनाया गया ओम सर्टिफिकेशन रणजीत सावरकर ने बताया कि, हिंदुओं की आस्था का सम्मान करने के लिए ‘ओम प्रतिष्ठान’ की स्थापना की गई है। प्रसाद और पूजा सामग्री की शुद्धि के साथ-साथ समस्त हिंदू व्यवसायियों और हिंदू ग्राहकों को हिंदू नीति के अनुसार खाद्य पदार्थ, वस्तुएं और अन्य व्यापार मिलें, इसके लिए ‘ओम प्रमाण पत्र’ अभियान शुरू किया गया है। यह प्रमाण पत्र केवल हिंदुओं के लिए है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है। यदि थूक, फूंक, चर्वोयुक्त भोजन का उपयोग हिंदुओं की वस्तुओं पर होता है, तो यह हमारी आस्था पर हमला है, और इसलिए ‘ओम प्रमाण पत्र’ वितरण करने का निर्णय लिया गया है। क्या है ‘ओम प्रमाण पत्र’ अभियान?


