जामताड़ा में मंगलवार को 1980 में बोल्डर के सहारे बना दक्षिण बहाल का पुल धंस गया। इससे सैकड़ों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है। यह पुल जामताड़ा जिले की लाइफलाइन था। इसके धंसने से क्षेत्र के लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। पुल 18 जुलाई को भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हुआ था। तब से इस पर सिर्फ छोटे दोपहिया वाहनों की आवाजाही हो रही थी। 11 दिन बाद आज यह पूरी तरह से धंस गया। इसके बाद पुल पर अब गाड़ियों की आवाजाही बिल्कुल बंद कर दी गई है।
15 से 20KM का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा पुल के टूटने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है। पहले लोग आधा किलोमीटर की दूरी तय करके जिला मुख्यालय पहुंचते थे। अब उन्हें 15 से 20 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है। इससे सदर अस्पताल, केंद्रीय विद्यालय, आईटीआई और सेंट एंथोनी स्कूल जाने वालों को भी परेशानी हो रही है। सैकड़ों छात्र स्कूल और कॉलेज नहीं जा पा रहे इस घटना से सबसे ज्यादा छात्र-छात्राएं प्रभावित हुए हैं। पुल धंसने के कारण सैकड़ों छात्र स्कूल और कॉलेज नहीं जा पा रहे हैं। इससे उनकी शिक्षा बाधित हो रही है। दिहाड़ी मजदूरों की समस्या भी बढ़ गई है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग शहर में मजदूरी करने जाते थे। अब वे काम पर नहीं जा पा रहे हैं। इससे उनकी आजीविका पर संकट आ गया है। जामताड़ा और देवघर को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल था मरीजों को भी सदर अस्पताल पहुंचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह पुल जामताड़ा और देवघर को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग था। इससे प्रतिदिन हजारों की संख्या में दोपहिया और भारी वाहनों का परिचालन होता था। नदी में तेज पानी का बहाव स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से नए पुल के निर्माण की भी मांग की है। पुल टूटने की सूचना मिलने पर प्रशासन मौके पर पहुंचा। वह लोगों को क्षतिग्रस्त पुल के समीप जाने से रोक रहा है। नदी में तेज पानी का बहाव है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। पुल पर बैरिकेटिंग के लिए डीसी द्वारा निर्देश दिया गया है। पुनः निर्माण के लिए विभाग से पत्राचार करने के लिए कहा गया है। वैकल्पिक रूट को ठीक करने के लिये निर्देश दिया गया है। -अनंत कुमार, एसडीएम, जामताड़ा।


