परिवहन विभाग में रहकर करोड़ों की संपत्ति जुटाने वाले सौरभ शर्मा के ठिकानों पर कार्रवाई में लोकायुक्त पुलिस की लापरवाही सामने आई है। गुरुवार 19 दिसंबर को सुबह 6 बजे जब लोकायुक्त पुलिस की टीम ने सौरभ शर्मा के अरेरा कॉलोनी ई-7 स्थित मकान नंबर 78 और एक अन्य मकान ई-7/657 पर एक साथ कार्रवाई की। उसी दौरान सोना और कैश से भरी कार कॉलोनी से निकली थी। लोकायुक्त का दावा है कि 78 नंबर मकान सौरभ शर्मा का आवास है और 657 नंबर मकान कार्यालय चलाया जा रहा था। लेकिन बताया जा रहा है कि ये कार ई-7 से ही निकली थी। छापों के बाद यह कार क्रमांक एमपी 04 बीए 0050 गुरुवार देर रात मेंडोरी में एक फार्म हाउस के अंदर मिली थी। यह सौरभ शर्मा के सहयोगी चेतन सिंह गौर की थी। जानकारी के मुताबिक, कार को प्यारे नाम का युवक चला रहा था। उसकी मोबाइल लोकेशन से पता चला है कि छापों के दौरान ये कार अरेरा कॉलोनी के ई-7 में थी । प्यारे फिलहाल पुलिस की पहुंच से दूर है। सौरभ शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका भोपाल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने खारिज कर दी है। आज (गुरुवार) ही सौरभ ने अपने वकील राकेश पाराशर के जरिए अग्रिम जमानत याचिका फाइल की थी। सुनवाई शुक्रवार को होना थी, लेकिन वकील के अनुरोध पर जज ने आज ही सुनवाई की और सौरभ शर्मा की याचिका को खारिज कर दिया। लोकायुक्त के छापे की कार्रवाई के 7 दिन बाद सौरभ शर्मा ने अपना पक्ष रखा है। सौरभ शर्मा के वकील ने अदालत में दलील दी कि आरोपी लोक सेवक नहीं है, उसे अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाए। न्यायाधीश ने अपने आदेश में उसे लोक सेवक मानते हुए और अपराध की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया। वकील बोला- लोकायुक्त की कार्रवाई
सौरभ के वकील राकेश पाराशर ने कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लोकायुक्त की कार्रवाई को गलत बताया है। एडवोकेट राकेश पाराशर के मुताबिक, सौरभ लोकसेवक नहीं है। इसके बाद भी लोकायुक्त ने उसके घर छापा मारा। यह कार्रवाई पूरी तरह से गलत है। जिस कार में सोना मिला, वो उसके नाम नहीं है। इस सोने से भी उसका कोई लेना-देना नहीं है। पाराशर का कहना है कि हम चाहते हैं कि हमें अग्रिम जमानत का फायदा मिले, जिससे हम पूरी मजबूती के साथ सामने आएं और अपनी बात को रख सकें। हम जांच में पूरी तरह से सहयोग करने को तैयार हैं। जहां हिसाब देना होगा, वो भी देंगे। इससे साफ हो जाएगा कि सौरभ के पास बरामद माल कहां से और कैसे आया है। 19 दिसंबर को लोकायुक्त ने मारा था छापा
बता दें कि लोकायुक्त पुलिस ने 19 दिसंबर को आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के घर और दफ्तर पर छापा मार कार्रवाई की थी। लोकायुक्त को 2.95 करोड़ रुपए कैश, करीब दो क्विंटल वजनी चांदी की सिल्लियां, सोने-चांदी के जेवरात और कई प्रापर्टी के दस्तावेज मिले थे। गुरुवार रात को ही भोपाल के मेंडोरी के जंगल में एक कार से 54 किलो सोना और 10 करोड़ रुपए कैश मिले थे। ये कार सौरभ के दौस्त चेतन सिंह की थी। जिसके बाद से जब्त सोना और कैश के तार सौरभ से जोड़े जाने लगे। ईडी ने सौरभ पर केस भी दर्ज किया है। सवा दो करोड़ में खरीदा था बंगला
सौरभ भोपाल शहर के अरेरा कॉलोनी में बंगला नंबर E-7/78 में रहता है। 2015 में उसने इसे सवा दो करोड़ रुपए में खरीदा था। हालांकि, सौरभ इसे अपने बहनोई का बंगला बताता है। बंगले की मौजूदा कीमत 7 करोड़ रुपए है। सूत्रों के मुताबिक, नौकरी करते समय सौरभ ने यह बंगला किसी अन्य के नाम से खरीदा था। आरक्षक से बिल्डर बना सौरभ शर्मा
परिवहन विभाग के सीनियर अफसर बताते हैं कि सौरभ के पिता स्वास्थ्य विभाग में थे। 2016 में उनकी मृत्यु के बाद उनकी जगह अनुकंपा नियुक्ति के लिए सौरभ की तरफ से आवेदन दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने स्पेशल नोटशीट लिखी कि उनके यहां कोई पद खाली नहीं है। अक्टूबर 2016 में कॉन्स्टेबल के पद पर भर्ती सौरभ की पहली पोस्टिंग ग्वालियर परिवहन विभाग में हुई। मूल रूप से ग्वालियर के साधारण परिवार से संबंध रखने वाला सौरभ का जीवन कुछ ही साल में पूरी तरह बदल गया। नौकरी के दौरान ही उसका रहन-सहन काफी आलीशान हो गया था। इससे उसके खिलाफ शिकायतें विभाग और अन्य जगहों पर होने लगीं। कार्रवाई से बचने के लिए सौरभ ने वॉलंटरी रिटायरमेंट स्कीम के तहत रिटायरमेंट ले लिया। इसके बाद भोपाल के नामी बिल्डरों के साथ मिलकर प्रॉपर्टी में बड़े पैमाने पर निवेश करना शुरू कर दिया।


