संत सियाराम बाबा की चरण पादुका स्थापित:साकेतवास महोत्सव पर गांव में कराया भ्रमण, हुआ भंडारा; एक लाख से ज्यादा अनुयायी शामिल​​​

खरगोन जिले में 11 दिसंबर को ब्रह्मलीन हुए निमाड़ प्रसिद्ध संत सियाराम बाबा का शुक्रवार को साकेतवास महोत्सव और 17वीं भंडारे का आयोजन हुआ। कसरावद के तेली भट्यान गांव स्थित बाबा के आश्रम में दूर दराज के एक लाख से ज्यादा अनुयायी शामिल हुए। यहां सुबह 8 बजे पूजन, अभिषेक, राम रक्षा स्त्रोत पाठ हुआ। उसके बाद बाबा की चरण पादुकाओं का पूजन कर ग्राम में भ्रमण कराया गया। पादुका स्थापना के साथ गोशाला राधा कृष्ण मंदिर के सामने भंडारा शुरू हुआ। इसमें संत-महंत सहित एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हुए। एक साथ 5 हजार श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादी
बाबा के भक्त मुरली भमोरिया, कैलाश राठौर ने बताया कि महोत्सव को लेकर क्षेत्र में निमंत्रण दिया गया था। इसके बाद आज सब्जी-पुड़ी और बूंदी महाप्रसादी का भंडारा हुआ। इसमें एक साथ 5000 अनुयायियों ने महाप्रसादी ग्रहण की। लोगों का आना लगातार जारी है। कार्यक्रम के दौरान गांव में पार्किंग के लिए पीपलगोन मार्ग, पुनर्वास क्षेत्र में जगह चिह्नित की गई है। तेली भट्याण का नाम संत सियाराम नगर रखने पर सहमति
कसरावद एसडीएम सत्येंद्र बैरवा ने बताया कि तेली भट्याण गांव का नाम संत के नाम से हो, इसे लेकर अत्येंष्टि वाले दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की थी। ग्रामीणों ने आपस में विचार-विमर्श कर पंचायत के माध्यम से ठहराव प्रस्ताव प्रशासन को दिया है। इसमें तेली भट्याण का नाम संत सियाराम नगर रखने पर सभी ने सहमति दी है। बता दें कि प्रसिद्ध संत सियाराम बाबा का 11 दिसंबर को 110 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। बाबा ने बुधवार को मोक्षदा एकादशी पर सुबह 6:10 बजे अंतिम सांस ली। बाबा 10 दिन से निमोनिया से पीड़ित थे। निधन से देशभर में उनके अनुयायियों में शोक की लहर है। 10 साल तक खड़े रहकर मौन तपस्या की
संत सियाराम के अनुयायियों ने बताया, बाबा का असली नाम कोई नहीं जानता। वे 1933 से नर्मदा किनारे रहकर तपस्या कर रहे थे। 10 साल तक खड़े रहकर मौन तपस्या की। वे करीब 70 साल से रामचरित मानस का पाठ भी कर रहे थे। उन्होंने अपने तप और त्याग से लोगों के हृदय में जगह बनाई। उनके मुंह से पहली बार सियाराम का उच्चारण हुआ था, तभी से लोग उन्हें संत सियाराम बाबा कहकर पुकारते हैं। उनके आश्रम में श्रीराम धुन 24 घंटे चलती रहती है। वे अपने शिष्यों से महज ₹10 भेंट ही लेते थे। सियाराम बाबा ने नागलवाड़ी धाम और खारघर इंदौर की सीमा स्थित जामगेट के पास स्थित विंध्यवासिनी मां पार्वती मंदिर में 25 लाख रुपए से ज्यादा की रकम मंदिर निर्माण में भेंट की। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण में भी 2 लाख रुपए भेंट भेजे थे। क्षेत्र में उनके अनुयायियों के लिए यात्री प्रतीक्षालय भी बनवाया था। सीएम डॉ. मोहन यादव ने अर्पित की थी पुष्पांजलि
संत के निधन के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव दोपहर 3 बजे भट्ट्यान आश्रम पहुंचे थे। उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान सीएम ने कहा था- बाबा की समाधि और क्षेत्र को पवित्र क्षेत्र बनाएंगे। पर्यटन स्थल बनाया जाएगा। यहां के विकास के लिए कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। सीएम के साथ प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा भी मौजूद रहे। उन्होंने भी बाबा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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