डॉक्टर की अंतरात्मा के द्वंद्व को दिखाया विद्यार्थियों की ओर से प्रस्तुत नाटक “मंत्र’ में एक प्रसिद्ध डॉक्टर और उसकी प|ी की अंतरात्मा के द्वंद्व को दर्शाया गया। एक ओझा अपने बीमार बच्चे को लेकर डॉक्टर से सहायता की गुहार लगाता है, लेकिन डॉक्टर उसकी बात को हल्के में लेते हुए कहता है कि यह अभी हमारे खेलने का समय है। चिकित्सा के अभाव में बच्चे की मृत्यु हो जाती है। कुछ समय बाद डॉक्टर के बेटे को सांप डस लेता है। डॉक्टर की दवा से लेकर झाड़फूंक काम नहीं आती और सभी बच्चे को मृत घोषित कर देते हैं। जबकि ओझा उसके बेटे की जान बचा लेता है। इसके बाद से डॉक्टर और उसकी प|ी आत्मग्लानि से भर जाते हैं। कहानी का अंत डॉक्टर के आत्मबोध और पश्चाताप की भावना से होती है। आईआईएम के स्टूडेंट्स की परिपक्व एक्टिंग देख सबने तालियां बजाईं। आईआईएम रांची के राजभाषा प्रकोष्ठ की ओर से गुरुवार को हिंदी साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की 145वीं जयंती पर सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। संस्थान का ड्रामा क्लब ड्रामेबाज की ओर से प्रेमचंद की चर्चित कहानी “मंत्र’ पर नाट्य प्रस्तुति हुई। मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. कमल कुमार बोस थे। उन्होंने हिंदी भाषा को आत्मीयता के साथ अपनाने के लिए प्रेरित किया। मडीन इइसी प्रो. अमित सचान समेत अन्य शिक्षक मौजूद थे। मुख्य भूमिकाओं में निखिल गुप्ता- भगत बने थे। वहीं सृष्टि-भगत की प|ी, साकेत प्रधान- डॉ. चड्डा, संगिनी वर्मा-डॉ. चड्डा की प|ी, सूरज कुशवाहा-कैलाश, अमित- विनिला, सक्षम-कैलाश का दोस्त, दीपा-गांववाली, सौरभ, नरसिम्हन, जयराम, तारिनी, अमन डॉक्टर के दोस्त बने थे। एस विनय राजशेखर- बाबा, सोलो एक्ट-कुणाल। निहारिका, पीयूष, रूपमनी- आयोजनकर्ता के रूप में थे।


