RTE यानी राइट टू एजुकेशन के तहत दूसरे चरण की लॉटरी में 10 हजार से अधिक बच्चों का चयन निजी स्कूलों के लिए हुआ। लेकिन इसके बाद भी प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों की 6 हजार से ज्यादा सीटें खाली है। बता दें कि RTE के तहत प्राइवेट स्कूलों की एंट्री पॉइंट कक्षाओं की 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों को प्रवेश दिए जाने का प्रावधान है। RTE की सीटों के लिए हर साल आवेदन मंगाए जाते हैं। पहले चरण में 40 हजार बच्चों का चयन हुआ था। इनमें से 36 हजार बच्चों ने निजी स्कूलों में प्रवेश लिया। 4 हजार सीटें खाली रह गई थी। इस तरह 52 हजार सीटों में 16 हजार सीटें खाली थी। 16 सीटों के 42 हजार से अधिक आवेदन आए थे इसके लिए फिर से ऑनलाइन आवेदन मंगाए गए थे। 16,967 रिक्त सीटों के लिए दूसरे चरण में लगभग 42,363 आवेदन मिले। दस्तावेजों की जांच के बाद लॉटरी निकाली गई। सेकेंड फेज में 10,478 बच्चों का चयन 6,953 स्कूलों के लिए हुआ है। दो चरणों की लॉटरी के बाद प्रदेश के निजी स्कूलों में अब भी 6 हजार से ज्यादा सीटें खाली रह गई। इन सीटों पर अब निजी स्कूल सीधे प्रवेश दे सकेंगे। इन बच्चों को शीघ्र ही आवंटित स्कूलों में प्रवेश लेना होगा। चालू शिक्षा सत्र 2025-26 में निजी स्कूलों में RTE की 5,2035 सीटों के लिए पहले फेज में 1 लाख 5 हजार 372 और दूसरे में 42 हजार 362 आवेदन आए थे। सबसे ज्यादा प्रवेश सूरजपुर जिले में
दूसरे चरण की लॉटरी में सबसे ज्यादा प्रवेश सूरजपुर जिले में हुआ है। यहां के निजी स्कूलों में बीपीएल बच्चों के लिए 1496 सीटें खाली थी। लॉटरी में 1036 बच्चों का चयन हुआ है। इसी तरह रायपुर में 750, बिलासपुर में 972, दुर्ग में 667, जांजगीर-चांपा में 837, बलरामपुर में 671, कोरबा में 504, बलौदाबाजार भाटापारा में 461 और कवर्धा जिले में 321 बच्चों का चयन निजी स्कूलों के लिए हुआ है


