90 के दशक में सुदूर गुदड़ी क्षेत्र में बिरसाईत समुदाय के धर्म स्थल देवां पहुंचे थे शिबू सोरेन

भास्कर न्यूज | सोनुआ शिबू सोरेन का पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा की धरती और कोल्हान क्षेत्र से भी काफी लगाव था। वे 90 के दशक में पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा जिला के सुदूर क्षेत्र में स्थित गुदड़ी क्षेत्र के बिरसाईत समुदाय के धर्मस्थल देवां पहुंचे थे।शिबू सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ करीब तीन दशक तक साथ रहे गुदड़ी क्षेत्र के आंदोलनकारी नेता बिरसा मुंडा के आमंत्रण पर वे यहां पहुंचे थे। उस वक्त की एक तस्वीर सामने आई है जिसमें उनके साथ उनके आंदोलनकारी साथी चंपई सोरेन, सुधीर महतो, शैलेन्द्र महतो, विद्युत वरण महतो, बहादुर उरांव, बिरसा मुंडा और अन्य नजर आ रहे हैं। बिरसा मुंडा ने गुरुजी के निधन पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि गुरुजी के सानिध्य में उन्होंने करीब तीन दशक तक क्षेत्र के लोगों के लिए आंदोलन किया और हमेशा उनका मार्गदर्शन मिलता था। उनका इस क्षेत्र से काफी लगाव था और वे इस क्षेत्र में आते थे। भास्कर न्यूज | सरायकेला वर्ष 2019 के चुनाव प्रचार में अंतिम बार दिशोम गुरु शिबू सोरेन सरायकेला आए थे। उन्होंने सरायकेला प्रखंड के सिदाडीह मैदान में चुनावी सभा को संबोधित किए थे। अपनी लड़खड़ाती आवाज के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा के तत्कालीन उम्मीदवार चंपाई सोरेन के पक्ष में मतदान करने के लिए में हाथ जोडे थे। इसके पूर्व 2014 के चुनाव में जिले के राजनगर प्रखंड परिसर स्थित हाई स्कूल मैदान में सभा को संबोधित किए थे तथा 2009 के चुनावी सभा के दौरान सरायकेला नगर क्षेत्र के बिरसा मुंडा स्टेडियम में अपनी हुंकार भरी थी। उनके निधन से झारखंड मुक्ति मोर्चा के सभी पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता हताश हो गए हैं । गहरी दुख व्यक्त करते हुए झामुमो जिला उपाध्यक्ष भोला महंती ने कहा कि झारखंड के रामगढ़ जिला के नेमरा के बीहड़ गांव से निकलकर झारखंड की राजनीति के ध्रुव तारा,सत्ता के शिखर तक पहूंचने वाले जननेता, अलग झारखंड राज्य आंदोलन में अहम् भूमिका निभाने वाले, संघर्ष और बलिदान की मिसाल दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जाना पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है।

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