उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी, अंकों की जांच और री-इवैल्युएशन के लिए कल से करें अप्लाई

भास्कर न्यूज | जालंधर सीबीएसई ने कक्षा 12वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा 2025 के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इसके बाद बोर्ड ने कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए तीन अहम सुविधाएं शुरू की हैं। छात्र अब अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी मंगा सकते हैं, अंकों की जांच (वेरिफिकेशन) करवा सकते हैं और री-इवैल्युएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। ये सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह ऑनलाइन होंगी और तय समयसीमा में ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए जारी किए पत्र में कहा गया है कि छात्र सबसे पहले अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह सुविधा 12वीं के छात्रों के लिए 6 से 7 अगस्त 2025 तक और 10वीं के छात्रों के लिए 8 से 9 अगस्त 2025 तक उपलब्ध होगी। इसके लिए प्रति विषय 700 रुपए (12वीं) और 500 रुपए (10वीं) शुल्क लगेगा। स्कैन कॉपी छात्रों के लॉगिन अकाउंट में उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें परीक्षक की पहचान से जुड़ी जानकारी हटा दी जाएगी। स्कैन कॉपी देखने के बाद छात्र अंकों की जांच (वेरिफिकेशन), री-इवैल्युएशन या दोनों के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह सुविधा 12वीं के लिए 13 से 14 अगस्त और 10वीं के लिए 18 से 19 अगस्त 2025 तक उपलब्ध होगी। वेरिफिकेशन के लिए 500 रुपए प्रति उत्तर पुस्तिका और री-इवैल्युएशन के लिए 100 रुपए प्रति प्रश्न शुल्क लगेगा। वहीं सभी आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। ऑफलाइन या तय समय के बाद भेजे गए आवेदन स्वीकार नहीं होंगे। आवेदन शुल्क केवल ऑनलाइन (डेबिट/क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग) के जरिए जमा किया जा सकता है। डाक, ड्राफ्ट, चेक या नकद स्वीकार नहीं होंगे। एक छात्र एक ही बार में सभी विषयों के लिए आवेदन कर सकता है। अलग-अलग बार में आवेदन की अनुमति नहीं होगी। री-इवैल्युएशन का परिणाम अंतिम होगा और इसके खिलाफ कोई अपील नहीं की जा सकेगी। यदि अंकों में बदलाव होता है (बढ़े या घटे), तो छात्र को पुराना मार्कशीट-प्रमाणपत्र जमा कर नया लेना होगा। वहीं एक अंक भी घटा तो उसे लागू किया जाएगा। इसके साथ ही कहा गया है कि किसी भी प्रक्रिया में जमा किया गया शुल्क वापस नहीं किया जाएगा, चाहे परिणाम में बदलाव हो या नहीं।छात्र आरटीआई एक्ट 2005 के तहत उत्तर पुस्तिका की कॉपी प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन वेरिफिकेशन या री-इवैल्युएशन की मांग आरटीआई के तहत नहीं की जा सकती।

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