आज ब्याज दर में 0.25% कटौती हो सकती है:इससे लोन-EMI सस्ते होंगे, RBI मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग खत्म होगी

रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) मीटिंग आज यानी 6 अगस्त को खत्म होगी। एक्सपर्ट्स के अनुसार मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी इस बार भी रेपो रेट में 0.25% कटौती कर सकती है। यानी, आने वाले दिनों में लोन सस्ते हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि अमेरिका के टैरिफ वॉर और ग्लोबल अनिश्चितता से GDP ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। ऐसे में RBI एक आखिरी कटौती कर सकता है, ताकि ग्रोथ को सपोर्ट मिल सके। आज सुबह 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा इस मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी देंगे। अभी रेपो रेट गिरकर 5.50% पर है। MPC में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। लगातार 3 बार में 1% की कटौती हो चुकी है
RBI इस साल लगातार तीन बार में ब्याज दरों में 1% की कटौती कर चुका है। फरवरी में हुई मीटिंग में ब्याज दरों को 6.50% से घटाकर 6.25% कर दिया था। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की ओर से ये कटौती करीब 5 साल बाद की गई थी। दूसरी बार अप्रैल में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर 0.25% घटाई गई। तीसरी बार दरों में कटौती जून में हुई। फिलहाल रेपो रेट 5.50% पर है। रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर बैंक RBI से कर्ज लेते हैं। जब RBI रेपो रेट घटाता है, तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है, और वो इस फायदे को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। यानी, आने वाले दिनों में होम और ऑटो जैसे लोन 0.50% तक सस्ते हो जाएंगे। रेपो रेट के घटने से क्या बदलाव आएगा?
रेपो रेट घटने के बाद बैंक भी हाउसिंग और ऑटो जैसे लोन्स पर अपनी ब्याज दरें कम कर सकते हैं। आपके सभी लोन सस्ते हो सकते हैं और EMI भी घटेगी। ब्याज दरें कम होंगी तो हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी। ज्यादा लोग रियल एस्टेट में निवेश कर सकेंगे। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है?
किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।

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