भास्कर न्यूज| चाईबासा पद्मावती जैन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, चाईबासा में बुधवार को कक्षा षष्ठ से दशम तक के अभिभावक गोष्ठी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कोल्हान विश्वविद्यालय के लिंग्विस्टिक प्रो. डॉ. बसंत चाकी, विशिष्ट अतिथि विज्ञान की शिक्षिका पूनम कुमारी हंसदा, समिति के अध्यक्ष रामध्यान मिश्र, सदस्य अनंतलाल विश्वकर्मा व प्रधानाचार्य रामाकांत राणा ने भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलन व पुष्प अर्पित कर किया। इसके उपरांत मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि को अंग वस्त्र देकर प्रधानाचार्य और समिति के सदस्य अनंत लाल विश्वकर्मा ने संयुक्त रूप से सम्मानित किया।मौके पर दशम के कक्षाचार्य उमाशंकर पांडेय ने विद्यालय के आगमन से निगमन तक की समस्त गतिविधियों का उल्लेख किया। गोष्ठी में अनेक सुझाव भी प्राप्त हुए। एक सुझाव पूनम कुमारी हंसदा के द्वारा आया कि बच्चों को जोर-जोर से पढ़ने के लिए कहा जाए ताकि उनके उच्चारण करते समय ग़लती का पता लग सके। गणित का सूत्र चार्ट पेपर पर बनाकर अध्यापन कार्य, साप्ताहिक जांच परीक्षा, भाषा कौशल पर ध्यान, परीक्षा के समय का समायोजन आदि। इन सब विषयों को प्रधानाचार्य ने गंभीरता से लेते हुए अतिशीघ्र पूर्ण करने का आश्वासन अभिभावकों को दिया। इस गोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ. बसंत चाकी ने अपने संबोधन में कहा कि मानव शरीर पंचतंत्र द्वारा निर्मित है। इसलिए उसका स्वभाव है कि वह अपनी समस्या का समाधान स्वयं ढूंढ लेता है। हमें लगता है कि बच्चे नहीं पढ़ेंगे पर ऐसा नहीं है, वे बिल्कुल पढ़ेंगे। यह मानव स्वभाव है। इस गोष्ठी में कुल 131 अभिभावक शामिल हुए। इस कार्यक्रम का संचालन व धन्यवाद ज्ञापन उमाशंकर पांडेय ने किया। अंत में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर उनकी आत्मा की शांति के लिए 2 मिनट का मौन रखकर उनको भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।


