इस रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं होने से भाई-बहन को इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बल्कि सूर्य उदय के साथ ही पूर्णिमा तिथि होने से शुभ मुहूर्त दिनभर रहेगा। इस दौरान बहनें अपने भाइयों का तिलक कर कलाइयों पर राखियां बांध सकेंगी। यही नहीं, इस बार कई दुर्लभ संयोग भी बन रहे हैं, जो इस पर्व को और खास बना रहे हैं। पंडितों के अनुसार, वर्ष 2025 का रक्षाबंधन नक्षत्र, वार, राखी बांधने का समय और पूर्णिमा तिथि का आरंभ और अंत लगभग वैसा ही शुभ संयोग लेकर आया है जैसा कि वर्ष 1930 में रक्षाबंधन के दिन देखा गया था। वहीं, राखी के एक दिन पहले शुक्रवार को राजधानी रायपुर के सभी मार्केट गुलजार दिखे। देर रात तक बहनें राखियों की दुकान के बाहर खड़ी नजर आईं। शहर के बाजार में भीड़ दोगुनी दिखी। बहनों को मायके बुलाने से लेकर घर-घर तैयारियां जोरशोर से चल रही है। मालवीय रोड, गोलबाजार, बैजनाथपारा में अनेक प्रकार की राखियों का स्टॉल सजा दिखा। कई तरह की राखियां मार्केट में उपलब्ध रक्षाबंधन के त्योहार को खास बनाने बाजार में 5 रुपए से लेकर 500 रुपए तक की राखियां मौजूद हैं। भाइयों की कलाई पर सजने वाली रेशमी डोरी से लेकर चंदन और तुलसी की लकड़ियों से बनी काष्ठ आर्ट राखियां तक की अच्छी-खासी मांग है। फैंसी राखियों में स्टोन और मोतियों से जड़ी डिजाइनर राखियां उपलब्ध हैं। वहीं, पर्यावरण के प्रति जागरूकता को ध्यान में रखते हुए लोकल आर्टिसन द्वारा तैयार की गई इको-फ्रेंडली राखियां भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। ये राखियां अनाज, फलों के बीज, फूल और पत्तियों से तैयार की गई हैं। इस बार दुर्लभ संयोग, 1930 के बाद पहली बार ऐसे ग्रह नक्षत्र पंडितों ने बताया कि कई सालों के बाद इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। इसलिए बहनें पूरे दिन किसी भी समय अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं। रक्षाबंधन पर पूरा दिन शुभ मुहूर्त रहेगा। शनिवार को ही है सावन पूर्णिमा 1930 में रक्षाबंधन 9 अगस्त को ही मनाया गया था और उस दिन भी शनिवार ही था। ठीक इसी तरह 2025 में ही 9 अगस्त को ही रक्षाबंधन है और इस बार भी रक्षाबंधन पर शनिवार ही है। इतना ही नहीं, वर्ष 1930 और 2025 दोनों में सावन पूर्णिमा की शुरुआत का समय भी लगभग एक जैसा है। 1930 में भी सौभाग्य योग और श्रवण नक्षत्र था जो इस साल भी है।


