भास्कर न्यूज | हजारीबाग शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट ऑफिस में पदस्थापित प्रधान लिपिक कुमुद कुमार सिन्हा के बेटे कुणाल कुमार सिन्हा की फर्जी बहाली का मामला सामने आया है। राइडर सिक्योरिटी एजेंसी की बहाली ने अस्पताल में कार्यरत आउटसोर्स ढाई सौ स्किल्ड कर्मियों की योग्यता पर सवाल खड़ा कर दिया है। इधर, कुणाल कुमार सिन्हा के मामले में चार सदस्यीय जांच कमेटी ने तीन पेज की जांच रिपोर्ट मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर एस के सिंह को सौंप दिया है। प्रिंसिपल डॉ. एसके सिंह ने उस रिपोर्ट को सील बंद लिफाफे में सरकार के संयुक्त सचिव स्वास्थ्य ललित मोहन शुक्ला को भेज दिया है। अब इस रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है। हॉस्पिटल कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक इस मामले में मैन्युअल अब्सेंटी पर हस्ताक्षर करने वाले डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर एके सिंह, प्रधान लिपिक सह फर्जी कर्मी के पिता कुमुद कुमार सिन्हा, लिपिक श्रवण कुमार और प्रधान लिपिक का पुत्र कुणाल कुमार सिन्हा को दोशी पाया है। जिसमें कमेटी ने अपने मंतव्य में कार्रवाई का अनुशंसा भी कर दिया है। जिस आउटसोर्स एजेंसी राइडर सिक्योरिटी के अधीनस्थ बहाल हुए कुणाल कुमार सिन्हा को स्किल्ड पोस्ट पर बगैर योग्यता के बहाल किए जाने का मामला सामने आया। उससे एजेंसी के माध्यम से ढाई सौ से अधिक स्किल्ड कार्यरत कर्मी की योग्यता पर सवाल खड़ा कर दिया है। बताया गया कि राइडर सिक्योरिटी एजेंसी के माध्यम से मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में स्किल्ड और नॉन स्किल्ड कुल 395 आउटसोर्स कर्मी कार्यरत हैं। जिसमें 45 स्किल्ड कर्मी कॉलेज में और लगभग 350 कर्मी हॉस्पिटल में पदस्थापित हैं। इनमें ढाई सौ स्किल्ड कर्मी हॉस्पिटल में कार्य कर रहे हैं। ऐसे स्किल्ड कर्मी नर्सिंग, कंपाउंडर, ड्रेसर, नेत्र सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर, लैब टेक्नीशियन समेत अलग-अलग पदों पर कार्यरत हैं। इसी तरह फर्जीवाड़ा में पकड़ा गया। कुणाल कुमार सिन्हा को भी नेत्र सहायक के पद पर बहाल किया गया था। जबकि उसके पास जो योग्यता चाहिए वह उस समय नदारद थी। इस मामले में लोगों का कहना है कि बड़ी बात यह है कि इस तरह से बगैर योग्यता के स्किल्ड पदों पर अगर और कर्मी बहाल किए गए होंगे तो मरीजों के जिंदगी के साथ खिलवाड़ है। स्किल्ड कर्मियों के भी योग्यता की जांच अस्पताल प्रबंधन करे। क्योंकि यह घटना पहली बार नहीं हुई है। इसके पूर्व एक फर्जी डॉक्टर राम बाबू प्रसाद पकड़ा गया था जिसका खुलासा दैनिक भास्कर ने किया था और उसे जेल जाना पड़ा था। पुनः एक फर्जी नेत्र सहायक पकड़ा गया है जो बगैर योग्यता के बहाल किया गया। ऐसे में लोगों का भरोसा स्वास्थ्य कर्मियों से उठेगा, संदेह होगा कि जो हमारा इलाज कर रहा है वह योग्य है या नहीं? मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर एस के सिंह ने कहा कि कमेटी ने सील बंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट सौंपा जिसे मैंने मुख्यालय को भेज दिया है और रिपोर्ट मुख्यालय में जमा भी हो गया है। अब आगे की कार्रवाई मुख्यालय को करना है।


