कई आदिवासी दिवस बीते, शुरू नहीं हुआ जनजातीय अध्ययन केंद्र, अनुसंधान रुका

भास्कर न्यूज | हजारीबाग देश में शनिवार को आदिवासी दिवस मनाया गया, लेकिन इनके लिए जो एसेट बनकर तैयार है उसे अब तक शुरू नहीं किया जा सका है। यह एसेट हजारीबाग में बना देश का दूसरा जनजातीय अध्ययन केंद्र ट्राइबल एजुकेशन सेंटर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हजारीबाग में देश की दूसरी ट्राइबल स्टडी सेंटर की स्थापना की थी। जिससे आदिवासी समाज से जुड़े विषयों पर अनुसंधान हो सके। करोड़ों रुपए खर्च करके विनोबा भावे विश्वविद्यालय परिसर में भव्य जनजातीय अध्ययन केंद्र बनाया गया जो वीरान पड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 फरवरी 2019 को जब झारखंड पहुंचे थे तो विनोबा भावे विश्वविद्यालय में जनजातीय अध्ययन केंद्र का ऑनलाइन शिलान्यास किया था। यह देश का दूसरा जनजातीय अध्ययन केंद्र था। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समाज के ऊपर अध्ययन करने के लिए छात्रों को प्रेरित करना था। भवन बन जाने के बाद भी सरकारी उदासीनता के कारण आज तक यहां पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। 22 हजार स्क्वायर फीट में 3 फ्लोर का बना हुआ यह सेंटर है। जिसमें चार स्टूडियो, एक क्लासरूम, एक ऑडिटोरियम, एक डायरेक्टर ऑफिस, एक ओपन ऑफिस, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब के साथ शौचालय बनाया गया है। आदिवासी संथाल समाज, झारखंड के केंद्रीय उपाध्यक्ष रमेश हेम्ब्रम ने भवन उपयोग में नहीं लाने को लेकर दुख जाहिर किया है। कहा कि सरकार के उदासीनता के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना हजारीबाग में साकार नहीं हो सका। राज्य सरकार एक ओर आदिवासी समाज के उत्थान की बात करती हैं तो दूसरी और उनसे जुड़े हुए अध्ययन केंद्र के प्रति उदासीन रवैया समझ के परे हैं। भवन बन जाने के बाद भी जनजातीय अध्ययन केंद्र में पढ़ाई लिखाई शुरू नहीं होना यह प्रशासनिक विफलता की कहानी कहती है। विश्वविद्यालय के कुलपति चंद्रभूषण शर्मा का कहना है कि भवन अब तक हैंडओवर नहीं किया गया है। जिसके कारण आदिवासी समाज के ऊपर जिस स्तर से शोध और पढ़ाई होनी चाहिए थी वह विश्वविद्यालय नहीं करा पा रहा है।

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