सांस्कृतिक संरक्षण का प्रतीक है आदिवासी िदवस

भास्कर न्यूज | महुआडांड़ संत जेवियर्स कॉलेज के सभागार में शनिवार को विश्व आदिवासी दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य डॉ. फादर एमके जोश, उप-प्राचार्य डॉ. फादर समीर टोप्पो, फादर राजीप तिर्की तथा असिस्टेंट प्रोफेसर रोज एलिस बारला ने की। कॉलेज के विद्यार्थियों ने इस विशेष दिन को यादगार बनाने हेतु सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इसमें नागपुरी, सादरी, खोरठा, संथाली सहित झूमर, छऊ, पाइका, डोमकच जैसे पारंपरिक आदिवासी नृत्य शामिल थे। इन नृत्यों के माध्यम से जनजातियों की अनूठी परंपराओं, संस्कृति और जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को मंच पर जीवंत किया गया। उत्कृष्ट प्रस्तुति देने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र और पुरस्कार प्रदान किए गए। असिस्टेंट प्रोफेसर रीमा रेणु ने अपने संबोधन में आदिवासी जीवन, परंपराओं और राष्ट्र व राज्य के विकास में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को आदिवासी समुदाय की संस्कृति और जीवन शैली की रूपरेखा से परिचित कराया। प्राचार्य फा. जोश ने अपने संदेश में कहा कि आदिवासियों ने मानव कल्याण के िलए जल, जंगल, खनिज संपदा और पर्यावरण का संरक्षण किया है। उनकी संस्कृति हमें प्रकृति के नियमों का पालन कर सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। अतः आदिवासी परंपरा और संस्कृति का संरक्षण अति आवश्यक है। बहुलवादी और समावेशी समाज के निर्माण के लिए उनकी सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण और सम्मान करना हमारा कर्तव्य है। कार्यक्रम के अंत में असिस्टेंट प्रोफेसर रोज एलिस बारला और रीमा रेणु कुंडलना ने सभी प्रोफेसर्स, गैर-शिक्षक कर्मचारियों और विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्राचार्य, उप-प्राचार्य सहित प्रोफेसर अभय सुकुट डुंगडुंग, रॉस एलिस बारला, रीमा रेणु, फादर राजीप, फादर समीर, फादर लियो, सिस्टर चंद्रोदय, शेफाली प्रकाश, रोज़ी सुष्मिता तिर्की, मनु शर्मा, अरेफुल हक़ सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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