जबलपुर में धान खरीदी का काम तेजी से जारी है। अब तक लगभग 270 करोड़ रुपए की धान खरीदी की जा चुकी है। इस बीच, मौसम विभाग ने 28 दिसंबर से 30 दिसंबर तक जबलपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया था। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद जबलपुर जिला प्रशासन ने निर्देश दिए थे कि वेयर हाउस के बाहर रखी धान को तुरंत तिरपाल और पालिथीन से ढक दिया जाए। लेकिन कलेक्टर के इन निर्देशों को प्रशासनिक अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया। नतीजतन, शनिवार को हुई बारिश के कारण 50 से अधिक केंद्रों पर रखी धान भीग गई। जबलपुर जिले में डेढ़ सौ से अधिक वेयर हाउस के बाहर धान खरीदी का काम जारी है। बारिश की संभावना को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि कुछ समिति संचालक और वेयर हाउस प्रभारी खुले में रखी धान को भीगने देना चाहते थे, ताकि गुणवत्ता हीन धान को गुणवत्ता वाली धान में बदला जा सके। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने निर्देश दिए कि यदि किसी वेयर हाउस प्रभारी या समिति संचालक के खिलाफ शिकायत मिली, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। भारी बारिश से नुकसान शनिवार को हुई भारी बारिश के मद्देनजर कलेक्टर ने पहले ही अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि वेयर हाउस के बाहर रखी धान को तिरपाल और पालिथीन से ढका जाए। साथ ही उन्होंने यह सुनिश्चित करने को कहा था कि किसी भी स्थिति में धान खराब न हो। लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते 50 से अधिक वेयर हाउस में रखी धान पानी में भीग गई। भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी रूपेंद्र पटेल ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जब मौसम वैज्ञानिकों ने पहले ही अलर्ट जारी कर दिया था, तो प्रशासन ने समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए। इसके चलते हजारों क्विंटल धान बारिश में भीग गई। उन्होंने इसे प्रशासन की घोर लापरवाही करार दिया और राज्य सरकार से मांग की कि ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो। धान खरीदी की स्थिति पर एक नजर नुकसान की भरपाई पर सवाल भारतीय किसान संघ ने साफ कहा है कि प्रशासन को पहले से मौसम की जानकारी थी, इसके बावजूद वेयर हाउस के बाहर रखी धान को सुरक्षित नहीं किया गया। संघ ने मांग की है कि लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए किसानों के नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए।


