झारखंड हाईकोर्ट ने स्टेशन रोड स्थित सरकारी बस डिपो के कंडम क्वार्टर में लोगों के रहने के मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की अदालत ने दैनिक भास्कर के सोमवार के अंक में प्रकाशित खबर “सरकारी बस डिपो के क्वार्टर कंडम, फिर भी जान जोखिम में डाल लोग रह रहे, हो सकता है हादसा’ पर स्वत: संज्ञान लिया है। अदालत ने इस मामले को जनहित याचिका में तब्दील करते हुए 13 अगस्त को सुनवाई की तिथि निर्धारित की है। अदालत ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग से जवाब मांगा है। मालूम हो कि सरकारी बस डिपो की स्थिति बेहद खराब है। बस डिपो के बगल में स्थित क्वार्टर कंडम घोषित है। इसके बावजूद यहां कई परिवार जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं। बिल्डिंग की छत और दीवार टूट कर गिर रही है। पिलर का सिर्फ सरिया बचा है। कंक्रीट और सीमेंट भी बह गया है। ईट टूटकर गिर रही है। क्वार्टर के चारों ओर जंगली घास उग गए है और जलजमाव है। इससे आसपास में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। कंडम बिल्डिंग के गिरने का खतरा मंडरा रहा है। इस वजह से आसपास के लोग डरे-सहमे रहते हैं। दूसरी ओर बस डिपो का टिकट काउंटर भी पूरी तरह जर्जर है। यहां पड़े परिवहन निगम की कंडम बसों के पार्ट्स की चोरी हो रही है। पूरा डिपो असमाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। इस वजह से रांची की छवि भी खराब हो रही है। 11 अगस्त


