भास्कर न्यूज | अमृतसर पावन वाल्मीकि तीर्थ एक्शन कमेटी के प्रधान कुमार दर्शन ने सरकार से आग्रह किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को तत्काल लागू करे। जिसमें अनुसूचित जातियों में उप-वर्गीकरण को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया है। यह फैसला पंजाब में वाल्मीकि और मजहबी सिख समुदायों के लिए शिक्षा और सेवाओं में आरक्षण का 50 प्रतिशत हिस्सा सुनिश्चित करता है, जो सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक रूप से सबसे अधिक वंचित समूह हैं। दर्शन का कहना है कि वाल्मीकि और मजहबी सिख स्टूडेंट्स की उच्च शिक्षा में नामांकन दर अन्य अनुसूचित जाति समूहों की तुलना में अत्यंत कम है। इन समुदायों के अधिकांश परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करते हैं और दिहाड़ी मजदूरी या सफाई कार्य जैसे कम वेतन वाले कार्यों पर निर्भर हैं। इससे बच्चों को शिक्षा की बजाय काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इन समुदायों का पंजाब के विश्व विद्यालयों और तकनीकी संस्थानों में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों में न्यूनतम प्रतिनिधित्व है। जिससे वाल्मीकि और मजहबी सिख स्टूडेंट्स वंचित रह जाते हैं।


