किसान धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण और पानी प्रबंधन जरूर करें

प्रतापपुर | प्रखंड मुख्यालय स्थित एक तीन तल्ला मकान पर सोमवार सुबह करीब 11 बजे ढलाई और ईंट-जोड़ाई के दौरान एक मजदूर अचानक संतुलन खो बैठा और तीसरी मंजिल से नीचे धरातल पर गिर गया। हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं, हालांकि उसकी जान बच गई। मजदूर की पहचान शिवबरत प्रजापति (30 वर्ष), पिता धर्मेंद्र प्रजापति, निवासी पक्कागढ़ के रूप में हुई है। चतरा| जिले के किसानों को इस समय धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण और पानी प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 20–25 दिन के धान में एक बार और 40–45 दिन में दूसरी बार निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। किसान चाहें तो कुदाल-कोदारिया से खरपतवार निकाल सकते हैं।बेहतर पैदावार के लिए खेतों में पानी 5–7 सेमी गहराई तक रखें, लेकिन 2–3 दिन सूखा छोड़कर फिर पानी भरें। इससे जड़ों को ऑक्सीजन मिलती है और पौधों की ऊर्जा बचती है। पौधे पीले या कमजोर दिखें तो नाइट्रोजन (यूरिया) की टॉप ड्रेसिंग करें। पहली खुराक रोपाई के 20–25 दिन बाद और दूसरी 40–45 दिन पर दें। प्रति एकड़ 5–10 किलो जिंक सल्फेट डालने से पत्तियों का पीला रोग और ठिगनापन कम होगा।फसल में तना छेदक या पत्ती लपेटक कीट दिखने पर क्लोरपायरीफॉस 20% EC या फिप्रोनिल 5% SC का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। झुलसा रोग के लक्षण आने पर मैनकोजेब + कार्बेन्डाजिम का स्प्रे करें। खेत की मेड़ मजबूत करें ताकि पानी और मिट्टी दोनों न बहें, जबकि बारिश में ढलान वाले खेतों में घास की पट्टी या नाला बंडिंग करना लाभदायक होगा। आप खेती-किसानी से जुड़े किस विषय पर जानकारी चाहते हैं, वॉट्सएप नंबर 947014 7400 पर सिर्फ मैसेज करें।

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