शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर पंजाब सरकार ने तीन साल में ट्रांसफर की पॉलिसी तो बनाई है मगर ग्राउंड लेवल पर हकीकत कुछ अलग ही है। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में 9 अफसर-मुलाजिम ऐसे हैं जो 7 से 15 साल से जमे हुए हैं। आप सरकार बनने पर भ्रष्टाचार पर नकेल कसने को लेकर बरसों से एक सीट पर जमे अफसरों को बदलने सहित कई बड़े दावे किए गए थे जो हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। तीन साल में ट्रांसफर की बात तो दूर एक अफसर ने तो ट्रस्ट में ही एसडीओ पद पर ज्वाइन किया फिर यहीं जेई लगे और अब एक्सईएन प्रमोट होकर काम कर रहे हैं। बता दें कि आरटीए-रेवेन्यू व दूसरे विभागों में अफसरों की बदलियां की गईं मगर नगर निगम-ट्रस्ट 2 ऐसे विभाग हैं, जहां अफसर-मुलाजिमों पर लोकल बॉडीज विभाग मेहरबान है। लंबे समय से एक सीट पर जमे अफसरों के ट्रांसफर मामले को लेकर एडिश्नल चीफ सेक्रेटरी लोकल बॉडीज से पूछा गया लेकिन उन्होंने चुप रहना जरूरी समझा। एक्सईएन अमनदीप सिंह ने साल 2009-10 में जेई पद पर ज्वाइन किया था। इसके बाद प्रमोट होकर एक्सईएन बन गए मगर ट्रांसफर नहीं किया जा सका। 15 साल से एक ही जगह तैनात हैं। जेई जसबीर सिंह करीब 7 साल से एक ही जगह जमे हुए हैं। बता दें कि लोकल बॉडीज विभाग ने बीते जून में प्रमोशनल विभाग के आदेशों का हवाला देते हुए लैटर जारी किया था कि 5 जून 2025 के अनुसार आम बदलियां खोल दी गई हैं। ट्रांसफर का समय 23 जून से 1 अगस्त 2025 तक निर्धारित किया गया। बाद में इसे बढ़ाकर 20 अगस्त कर दिया गया। नगर निगम में कुछ एक अफसरों के तबादले किए गए जो 3 साल से कम समय से सीट पर लगे थे। जबकि 5 से 15 साल तक से सीट पर जमे अफसरों के ट्रांसफर नहीं हुए। सीनियर एडवोकेट पीसी शर्मा का कहना है कि नियम-कानून सब लैटरों और दिखावे वाला रह गया है। भ्रष्टाचार खत्म करने के दावे किस तरह से हवा-हवाई साबित हो रहे नगर निगम और इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में कई साल से सीट पर जमे अफसरों का ट्रांसफर नहीं होना सिस्टम की पोल खोल रहा है। 3 साल तो दूर पूरी सर्विस ही एक जगह में देने का रिकार्ड बना लिया जा रहा है। दोनों ही विभागों पर सरकार-प्रशासन अधिक मेहरबान दिख रही है। रेवेन्यू-आरटीए विभागों में तो विजिलेंस छापेमारी भी हो रही लेकिन निगम-ट्रस्ट के अफसरों की कई शिकायतें भ्रष्टाचार मामले को लेकर की गई, कुछ में जांच भी चल रही। लेकिन इन विभागों के अफसरों पर उच्च अफसर कुछ अधिक मेहरबान रहते आए हैं। हैरान करने वाली बात है कि निगम के हेल्थ विभाग में एक अफसर 25 साल से सीट पर काबिज है। कुछ तो प्रोबेशन पीरियड पर 3 साल के लिए आए थे मगर 4 साल बीत चुके हैं। अब तो उन्हें भी लगने लगा है कि एक ही जगह में 15 साल तो अब कट ही जाएंगे।


