झारखंड अलग राज्य के लिए आंदोलन करने वालों के चिह्नित करने के लिए गठित झारखंड आंदोलनकारी चिह्नितीकरण आयोग का कार्यकाल जुलाई में ही खत्म हो गया। इससे आयोग में करीब 70 हजार आवेदन लंबित रह गए। इनमें से 18,500 आंदोलनकारी ऐसे हैं, जिन्हें आयोग ने चिह्नित कर लिया है। लेकिन कार्यकाल खत्म होने के कारण यह सूची संपुष्टि के लिए गृह विभाग को नहीं भेजी जा सकी। इससे मामला अटक गया। फिलहाल झारखंड में 39 हजार आंदोलनकारी हैं। इनमें से 32 हजार वैसे आंदोलनकारी हैं, जो आंदोलन के दौरान जेल गए थे। आयोग दो तरह के आंदोलनकारियों को चिह्नित कर रहा है। एक वैसे जो जेल गए थे। उन्हें सरकार प्रमाण पत्र के साथ पेंशन दे रही है। वहीं दूसरा वैसे आंदोलनकारी जो जेल तो नहीं गए, लेकिन आंदोलन में सक्रिय रहे। इन्हें सम्मान पत्र दिया जाता है। कुल 57 हजार आंदोलनकारी चिह्नित किए पहली बार 2012 में हुआ था आयोग का गठन: झारखंड आंदोलनकारी चिह्नितीकरण आयोग का गठन पहली बार 2012 में हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद की अध्यक्षता में हुई थी। उनके निधन के बादइ 2021 में रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी दुर्गा उरांव की अध्यक्षता में आयोग का पुनर्गठन किया गया। आयोग को 2022 में दो साल और 2024 में एक साल का अवधि विस्तार दिया गया। यह जुलाई में खत्म हो गया। चार उदाहरण से जानिए…जिनके मामले अटक गए {आंदोलन के दौरान जेल जाने वाले या भागीदारी करने वाले को आंदोलनकारी मान रहा आयोग बोकारो के साधु चरण महतो… बोकारो के चंदनकियारी के गलगल टांड़ निवासी साधु चरण महतो ने भी आयोग को आवेदन देकर उन्हें आंदोलनकारी के रूप में चिह्नित करने का आग्रह किया है। 56 वर्ष साधु चरण ने लिखा है कि झारखंड आंदोलन के दौरान वे जेल की यात्रा कर चुके हैं। इनका मामला भी आयोग के पास लंबित है। रामगढ़ के बल्कू करमाली बल्कू करमाली रामगढ़ के बुध बाजार के निवासी हैं। 69 वर्षीय बल्कू ने आयोग में आवेदन देकर उन्हें आंदोलनकारी के रूप में चिह्नित करने का आग्रह किया है। उन्होंने आवेदन में कहा कि है आंदोलन के दौरान वे 17 मार्च 1993 से 13 अप्रैल 1993 तक जेल में रहे। उनके खिलाफ केस भी दर्ज हुआ। इनका आवेदन भी लंबित रह गया है। शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन को भी आंदोलनकारी के रूप में चिह्नित किया गया है। लेकिन संपुष्टि के बाद ही उनका नाम सूची में जुड़ेगा। 63 वर्षीय रामदास सोरेन जमशेदपुर के घोड़ाबांधा के निवासी हैं। आयोग का कार्यकाल खत्म होने के कारण इनका नाम गृह विभाग को नहीं भेजा जा सका। कांग्रेस नेता प्रदीप बलमुचू प्रदीप कुमार बलमुचू को आयोग ने आंदोलनकारी के रूप में चिह्नित कर लिया हे। लेकिन इनकी सूची संपुष्टि के लिए नहीं भेजी जा सकी। 67 वर्षीय बलमुचू जमशेदपुर के सोनारी बी-ब्लॉक के रहने वाले हैं। आयोग को अवधि विस्तार मिलने और संपुष्टि के बाद ही इनका नाम आंदोलनकारियों की सूची में जुड़ेगा।


