एसीबी ने जेल में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को अब हजारीबाग के खास महाल जमीन घोटाले में आरोपी बनाया है। इस मामले में बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए विनय चौबे की हजारीबाग एसीबी की विशेष कोर्ट में पेशी हुई। जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में विनय चौबे को भी आरोपी बनाया गया है। एसीबी ने 8 अगस्त को यह केस दर्ज किया था। हालांकि उसमें तत्कालीन खास महाल पदाधिकारी विनोद चंद्र झा, बसंती सेठी, उमा सेठी, इंद्रजीत सेठी, राजेश सेठी, विजय प्रताप सिंह और सुजीत कुमार सिंह को ही आरोपी बनाया गया है। अब इस मामले में विनय चौबे को भी आरोपी बनाए जाने के बाद उनकी मुश्किलें और बढ़ गई है। विनय चौबे को एसीबी ने 20 मई को शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था। जिसके बाद से वे न्यायिक हिरासत में हैं। खास महाल जमीन घोटाला मामले में पूर्व में एसीबी ने प्रीलिमिनरी इंक्वायरी (पीई) दर्ज किया था। इसी के आधार पर एसीबी ने मामले में आरंभिक जांच पूरी कर मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के माध्यम से सरकार को प्रस्ताव भेजकर प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। सरकार से अनुमति मिलने के बाद एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज किया था। सुनियोजित तरीके से 23 निजी व्यक्तियों को आवंटित कर दी गई थी यह जमीन एसीबी ने इस मामले की जांच में पाया कि हजारीबाग की करीब 2.75 एकड़ खास महाल जमीन वर्ष 1948 में एक ट्रस्ट को 30 वर्षों के लिए लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि वर्ष 1978 में समाप्त होने के बाद इसका नवीकरण वर्ष 2008 तक के लिए किया गया था। लेकिन वर्ष 2008 से 2010 के बीच सुनियोजित तरीके से इस जमीन को सरकारी घोषित कर 23 निजी व्यक्तियों को आवंटित कर दिया गया। जांच के दौरान पाया गया कि लीज नवीकरण के दौरान ट्रस्ट सेवायत शब्द को तत्कालीन खास महाल पदाधिकारी ने जान-बूझकर हटाया था, ताकि ट्रस्ट की भूमि को सरकारी दिखाया जा सके। उसका अवैध रूप से हस्तांतरण किया जा सके। जांच के दौरान यह भी पाया गया था ट्रस्ट की भूमि को किसी और को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता था। इसके बाद भी ऐसा किया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एसीबी कोर्ट में हुई पेशी


