ऑपरेशन सिंदूर के हीरो रंजीत सिद्धू की कहानी:मुक्तसर से उड़ान का सपना देखा, अंबाला में राफेल लाकर इतिहास रचा; अब वीर चक्र

ऑपरेशन सिंदूर में योगदान के लिए वायु सेना के ग्रुप कैप्टन रंजीत सिंह सिद्धू को वीर चक्र मिला है। यह पहला मौका नहीं जब रंजीत सिद्धू के कारण पंजाब-हरियाणा को गौरव महसूस हो रहा है। वह पहले भी इतिहास रच चुके हैं। अम्बाला कैंट एयरफोर्स स्टेशन पर तैनाती के दौरान सिद्धू राफेल मिशन का हिस्सा रहे। अप्रैल 2021 में वह फ्रांस से राफेल उड़ाकर अंबाला एयरबेस पर लाने वाली टीम में थे। अब, ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना का अहम योगदान रहा। इसी शौर्य के लिए रंजीत सिंह सिद्धू को वीर चक्र की घोषणा हुई है। यह सम्मान भारतीय वायुसेना के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है। गैलेंट्री पुरस्कारों में परमवीर चक्र और महावीर चक्र के बाद वीर चक्र आता है। यह चक्र ऐसे योद्धाओं को मिलता है, जिन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया। रंजीत सिद्धू मूलरूप से पंजाब के श्री मुक्तसर साहिल जिले के गिद्दरबाहा शहर के हैं।करीब पांच साल पहले, जब फ्रांस से पहले बैच के राफेल फाइटर जेट भारत लाए गए, तो उनमें से एक जेट रंजीत सिंह सिद्धू उड़ा रहे थे। उस दिन देशभर की नजरें टीवी स्क्रीन पर थीं और पंजाब व गिद्देरबाहा के लोगों के दिल गर्व से भर गए थे। फुटबॉल खेलते-खेलते लिया एयरफोर्स जॉइन करने का सपना
रंजीत ने 12वीं तक की पढ़ाई गिद्दरबाहा के मालवा स्कूल से की। वे स्कूल की फुटबॉल टीम के कप्तान रहे और उनकी कप्तानी में स्कूल ने राज्य स्तर का टूर्नामेंट भी जीता। उनके शिक्षक बताते हैं कि वे पढ़ाई और खेल दोनों में बेहतरीन थे। स्कूल के वाइस-प्रिंसिपल जसबीर सिंह बराड़ बताते हैं कि रंजीत में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता रही। पढ़ाई में अव्वल, खेलों में आगे और हमेशा अनुशासनप्रिय
रंजीत को भारतीय वायुसेना में जाने की प्रेरणा उनके स्कूल के तत्कालीन प्रिंसिपल वेणुगोपाल से मिली, जो खुद रिटायर्ड स्क्वॉड्रन लीडर थे। कक्षा 10वीं में ही रंजीत के मन में एयरफोर्स के लिए जुनून जग गया। साल 1999 में 12वीं पास करने के बाद उन्होंने साल 2000 में NDA परीक्षा पास की और अपने सपनों की उड़ान शुरू की। रंजीत के पिता गुरमीत सिंह राजस्व विभाग से सेवानिवृत्त हैं। सुखोई से राफेल तक का सफर
रंजीत सिंह सिद्धू का सफर सिर्फ राफेल तक सीमित नहीं है। इससे पहले वे रूस से सुखोई जैसे एडवांस्ड फाइटर जेट भी भारत ला चुके हैं। उनके चाचा गुरदर्शन सिंह गर्व से बताते हैं- रंजीत ने हमेशा देश के लिए सर्वश्रेष्ठ दिया है। सुखोई से लेकर राफेल तक, उसने हर मिशन में अपनी क्षमता साबित की है। जानें ऑपरेशन सिंदूर, जिसके लिए जांबांजों को मिल रहा सम्मान
ऑपरेशन सिंदूर, 7 मई 2025 को शुरू हुआ। यह कार्रवाई भारत द्वारा पहलगांव पर हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 भारतीय मारे गए) की सामरिक प्रतिक्रिया थी। इस ऑपरेशन में सेना ने आतंकवादी ठिकानों पर निशाना साधा। इस अभियान में मुरिदके, बहावलपुर और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकवादी ठिकानों पर सटीक बमबारी की गई। 9 एयर वॉरियर्स को वीर चक्र, 1 को शौर्य चक्रऑपरेशन सिंदूर को सफलतापूर्वक अंजाम देने पर 9 एयर वॉरियर्स को वीर चक्र, एक को शौर्य चक्र और बाकी को वायुसेना पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया है। वायु सेना महानिदेशक की ओर से बताया कि इस ऑपरेशन में भारत ने कम से कम पांच पाकिस्तानी लड़ाकू विमान और एक बड़े एयरोबोर्न एयरमोबिल को मार गिराया, जिसमें से एक को लगभग 300 किमी की दूरी से मार गिराना रिकॉर्ड-तोड़ ‘सर्फेस-टू-एयर’ श्रेणी की सफलता थी।

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