भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव सरगुजा में धूमधाम से मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी पर अंबिकापुर के रियासतकालीन राधा-वल्लभ मंदिर में सजावट की गई है एवं श्रीकृष्ण का पालना सजाया गया है। यहां सुबह से ही श्रद्धालु पहुंचकर पूजा कर रहे हैं। रात 12 बजे यहां श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर विशेष पूजन का आयोजन होगा। यह मंदिर 94 वर्ष पुराना है। शहर में अलग-अलग स्थानों पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मटकी फोड़ प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गई हैं। सरगुजा में रियासत काल से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाता रहा है। सरगुजा महाराजा रामानुज शरण सिंहदेव ने अपनी माता के लिए पैलेस प्रांगण में राधा वल्लभ मंदिर का निर्माण वर्ष 1931 में कराया था। मंदिर में रामानुज शरण सिंहदेव की माता पूजा करतीं थीं। रियासतकाल में यहां 12 दिनों तक कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता था। राजपुरोहित कराते हैं कृष्ण जन्म
प्राचीन राधा वल्लभ मंदिर में जन्माष्टमी पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। शहर सहित आस-पास के इलाकों से यहां काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। राजपुरोहित द्वारा रात करीब 12 बजे विशेष पूजा अर्चना कर भगवान कृष्ण का जन्म कराने का विधि पूर्ण कराया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के लिए आकर्षक पालना भी मंदिर में सजाया गया है। शाम से ही भजन मंडलियों द्वारा विशेष भजन का आयोजन शुरू कर दिया गया है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु भक्तिभाव के साथ पूजा के साथ पालना झुलाते हैं। यहां दो दिनों तक पालन झुलाने के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। जगह-जगह मटकी फोड़ प्रतियोगिता
कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर अंबिकापुर में जगह-जगह मटकी फोड़ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है। इसके लिए आकर्षक सजावट भी की जा रही है। शाम छह बजे के बाद मटकी फोड़ समितियों के द्वारा मटकी टांगी जाएगी। मटकी फोड़ प्रतियोगिता का सबसे भव्य आयोजन पैलेस परिसर में किया जाता है, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु मटकी फोड़ प्रतियोगिता देखने के लिए पहुंचते हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मटकी फोड़ प्रतियोगिताओं के साथ ही राधा-वल्लभ मंदिर में श्रद्धालुओं की उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शाम को मुख्यमार्गों में जाम की स्थिति से निबटने के लिए कुछ मार्गों में चारपहिया वाहनों को प्रतिबंधित भी किया जाएगा।


