वन एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी ने कहा कि झारखंड में अक्षय उर्जा की व्यापक संभावना है। यहां के प्रचुर प्राकृतिक संसाधन राज्य को एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा में अग्रणी बनाएंगे। अक्षय ऊर्जा संभावना की बेहतर प्लानिंग करके झारखंड नेट-जीरो टारगेट और ग्रीन इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ सकता है। सिद्दीकी बुधवार को राजधानी के होटल बीएनआर चाणक्य में आयोजित ‘अन लॉकिंग रिन्युएबल एनर्जी एंड स्टोरेज पोटेंशियल असेसमेंट इन झारखंड’ रिपोर्ट के विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे। रिपोर्ट में राज्य के सभी 24 जिलों और प्रखंडों में करीब 66 गीगावाट अक्षय ऊर्जा की संभावित क्षमता की पहचान की गई है। पर्यावरण सचिव ने कहा कि झारखंड में एनर्जी ट्रांिजशन की रूपरेखा देने में यह रिपोर्ट काफी कारगर साबित होगी। शोध अध्ययन की सरहाना करते हुए उन्होंने कहा कि यह अपनी तरह का पहला हाई-रेजोल्यूशन आकलन है। बता दें कि इस असेसमेंट रिपोर्ट को झारखंड सरकार एवं सीड ने संयुक्त रूप से तैयार किया है। फ्यूचर इकोनॉमी में क्लीन एनर्जी की बड़ी भूमिका : रस्तोगी सेवानिवृत आईएफएस ए. के. रस्तोगी ने कहा कि फ्यूचर-रेडी इकोनॉमी बनाने में क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन की बड़ी भूमिका है। औद्योगिक विस्तार, कूलिंग व डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी नई जरूरतें बढ़ते एनर्जी डिमांड की ओर इशारा करते हैं। यह रिपोर्ट राज्य में ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र, ग्रीन जॉब्स तथा सामाजिक-आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करेगी, जिससे एनर्जी ट्रांजिशन को गति मिलेगी। कार्यक्रम में पीसीसीएफ (कैंपा) रवि रंजन, सीड के सीईओ रमापति कुमार, डॉ. मनीष राम, विभूति गर्ग, सचिन सिंह, मनोज कुमार करमाली सहित अन्य ने भी अपने विचार रखे। पश्चिमी व दक्षिणी राज्यों से सीख लेने की जरूरत : मुकेश योजना एवं विकास विभाग के सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि अक्षय ऊर्जा के मामले में अग्रणी बनने के लिए पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों से सीख लेने की जरूरत है। झारखंड के अप्रयुक्त प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग बुनियादी ढांचे और सततशील अर्थव्यवस्था के निर्माण में सहायक होगा। वैज्ञानिक आंकड़ों और रिसोर्स मैपिंग के आधार पर यह अध्ययन जिला एवं प्रखंड स्तर पर भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा के निर्माण को प्रस्तुत करता है। इसमें पंप-हाइड्रो एनर्जी स्टोरेज की गेम-चेंजर भूमिका पर जोर दिया गया है। झारखंड को देश के फ्रंटलाइन स्टेट्स में शामिल बताया गया है। सोलर एनर्जी में सबसे ज्यादा 41 गीगावाट क्षमता चिह्नित अक्षय ऊर्जा की संभावित उच्च क्षमता वाले जिलों में गिरिडीह, रांची, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम , हजारीबाग, पलामू और चतरा को चिन्हित किया गया है। रिपोर्ट में सबसे ज्यादा सोलर एनर्जी में करीब 41 गीगावाट क्षमता का आकलन किया गया है। यह क्षमता यूटिलिटी-स्केल, रूफटॉप, फ्लोटिंग, एग्रीवोल्टैक्स और कंसन्ट्रेटेड सोलर पावर से विकसित की जा सकती है।


