भास्कर संवाददाता | चूरू जिले में कई वर्षों से करीब नौ करोड़ रुपए का नगरीय विकास कर बकाया चल रहा है। चूरू नगर परिषद प्रशासन ने बकाया कर वसूली व चालू वर्ष में शत-प्रतिशत कर की प्राप्ति के लिए कार्ययोजना बनाई है। इसको लेकर स्वायत्त शासन विभाग, जयपुर की तरफ से भी सभी नगर निकाय के आयुक्त व ईओ को आदेश जारी किया गया है। चूरू आयुक्त अभिलाषा सिंह ने बताया कि आदेश की पालना में 15वें वित्त आयोग के तहत डोर-टू-डोर सर्वे करवाया जाएगा। इसके लिए न्यूनतम बोली के आधार पर निजी फर्म के टेंडर होंगे। अधिकृत फर्म शहर की सभी प्रोपर्टी का डोर-टू-डोर सर्वे कर डिजिटल डाटा तैयार करेगी। सर्वे करने के बाद उक्त फर्म ही गणना के आधार पर डीएलसी रेट के हिसाब से लोगों से नगरीय विकास कर की वसूली करेगी। चूरू शहर में अनुमानित 25 से 30 हजार हाउस होल्डस/संपतियां हैं। नगर परिषद में पर्याप्त स्टाफ के अभाव में आज तक कर वसूली के लिए उपयुक्त संपत्तियों का सर्वे नहीं करवाया जा सका है। अब सर्वे होने पर वास्तविक संपत्तियों का डाटा तैयार हो जाएगा। स्वायत्त शासन विभाग, जयपुर की तरफ से राज्य के सभी निकाय के आयुक्त/इओ को जारी आदेश के अनुसार वार्षिक दर बढ़ोतरी के साथ नगरीय विकास कर संग्रहण किए जाना जरूरी है। विभिन्न नगर निकायों द्वारा जारी निविदा प्रपत्र का अध्ययन करने पर सामने आया कि प्रस्तावित सर्वे कार्य करवाने के संबंधित नगर निकाय क्षेत्र का डाटा बेस तैयार होने के साथ ही नगरीय विकास कर वसूली में बहुत सुधार हुआ है। इसके चलते अब नवाचार को पूरे राज्य की नगर निकाय में लागू किए जाना प्रस्तावित है। बैंक में खुलेगा एस्क्रो अकाउंट, जनरेट होगा क्यूआर कोड : नगर परिषद की तरफ से बैंक में एस्क्रो अकाउंट खुलवाया जाएगा। अकाउंट खुलने के बाद बैंक से उसका क्यूआर कोड जनरेट करवाया जाएगा। डीएलसी दर के हिसाब से कर वसूली का डिमांड नोटिस ले जाने वाला फर्म का व्यक्ति मौके पर ही ऑनलाइन भुगतान करवा लेगा। इससे वसूली भी जल्दी और आसानी से होगी। वसूली पेंडिंग नहीं रहेगी। सर्वे के बाद कर योग्य व कर से छूट वाले सभी घर का ऑनलाइन डाटा तैयार हो जाएगा। अभी 300 वर्ग मीटर के घर कर से मुक्त हैं। डीएलसी दर से तय होता है विकास कर : शहर में अलग-अलग क्षेत्र में आवासीय व व्यावसायिक भूखंड संपत्तियों की अलग-अलग डीएलसी दर है। उसी हिसाब से नगरीय विकास कर वसूला जाता है। भूखंड के क्षेत्रफल से डीएलसी दर को गुणा कर उसमें दो हजार का भाग देने के बाद वार्षिक दर तय होगी है। जैसे नया बास में 500 मीटर गज का आवासीय भूखंड है। यहां की डीएलसी दर 6370 प्रति मीटर गज है। इस हिसाब से इस भूखंड का वार्षिक कर 1593 रुपए होगा।


