साथी को कमजोर पाते हैं तो उसकी मदद करें

भास्कर न्यूज | राजनांदगांव जैन बगीचे के नए हॉल में जारी चातुर्मासिक प्रवचन में गुरुवार को मुनि विनय कुशल श्रीजी के शिष्य मुनि वीरभद्र (विराग) श्रीजी ने कहा कि संघ का महत्व तभी होता है जब आप अपने आपको गौण मानकर संघ में शामिल प्रत्येक साथी को महत्व दें। अपने किसी साथी को यदि आप कमजोर पाते हैं तो आप उसकी मदद करें। भले ही वह आपका कर्जदार हो किंतु आप उस समय कर्ज को भूलकर उसे सांत्वना दें कि आपको यदि और सहयोग की जरूरत पड़े तो हम करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि यदि पवित्र भोजन भीतर जाता है तो व्यक्ति में परिवर्तन अवश्य आता है। किसी भी व्यक्ति को कमजोर ना समझें। आप उदारता से उसका सहयोग करें ताकि वह आपकी तरह साधार्मिक भक्ति कर सके। पर्यूषण पर्व के दौरान जो भी आराधना होती है, तत्वों को समझकर आत्म कल्याण के मार्ग में आगे बढ़ते जाएं। कहा कि बरघोड़ा कभी विफल नहीं होता। हम कहीं ना कहीं उसकी वास्तविकता को समझ नहीं पाते। यह परमात्मा को आकर्षित करता है। बरघोड़ा निकालते समय कुछ ऐसा भी आयोजन करते जाएं कि लोग धर्म के प्रति प्रेरित हो। अपनी गलतियों की माफी मांग लें: शासन प्रभावना के जो-जो तरीके हो वह करें। गलतियां कई बार होती है किंतु उसे छुपाएं नहीं बल्कि सामने वाले से अपनी गलतियों की माफी मांग लें। अपने पास बेहतर मौका है, पर्यूषण पर्व के इन आठ दिनों में हम अपने पाप धो सकते हैं और अपनी गलतियों की क्षमा मांग कर आत्म कल्याण के मार्ग में आगे बढ़ सकते हैं। धर्म के कार्यों में पैसा कभी पेंडिंग नहीं रखना चाहिए चातुर्मास पर प्रवचन देते हुए मुनि श्रीजी ने कहा कि हर मौसम का अलग-अलग प्रभाव होता है। मौसम के अनुसार वस्तुओं का व आराधना का प्रभाव भी अलग-अलग होता है। अपना विवेक जागृत होना चाहिए कि किस फील्ड में मेरी जरूरत है और यह विवेक भी होना चाहिए कि मुझे करना क्या है? धर्म के कार्यों में पैसा कभी पेंडिंग नहीं रखना चाहिए। धर्म के क्षेत्र में यदि अपना पैसा पेंडिंग होता है तो यह दुखदाई होता है। अपने को अपने द्रव्य का ज्यादा से ज्यादा सदुपयोग करना चाहिए। उन्होने कहा कि गुरु के कार्य के लिए यदि कुछ करना पड़े तो भी वह करें। रोज परमात्मा के दर्शन और एक सामायिक अवश्य करें।

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