गुमला में 12 माह में 71 की हत्या

राज्य गठन के 24 साल बाद गुजरते वर्ष 2024 में गुमला जिले में नक्सली व उग्रवादी घटनाओं में भारी कमी आई है। इसके चलते हत्या का ग्राफ काफी घटा है। जिले में अब हत्या की घटित घटना हो भी रही है तो वह मामूली विवादों में हो रही है। इन वारदातों का रोजाना सामने आना आम बात हो गई है। इससे साबित हो रहा है कि हाल के कुछ सालों में समाज और क्षेत्र का विकास हुआ है। लोगों में जागरूकता आई है। कुछ वर्ष पूर्व तंक नक्सल व उग्रवादी मामलों में पूरे राज्य में जिले की गिनती ऊपरी पायदान पर हुआ करता था। मगर समय बीतने व पुलिस की सक्रियता के कारण अब नक्सली व उग्रवादी अब पूरी तरह बैकफुट में है। वही कई आपराधिक गिरोह पर भी लगाम लगा है। एक समय था यहां नक्सली, उग्रवादी तथा अपराधियों की उपस्थिति के कारण गोलियों के तड़तड़ाहट व बम की आवाज से इलाका गूंजता रहता था।वहीं हत्या की घटनाओं का ग्राफ चरम पर हुआ करता था। एक साल में साढ़े तीन सौ से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया जाता था। लोग डर के साए में जीने को विवश रहते थे। हत्या का यह सर्वाधिक रिकॉर्ड 2008 का रहा है। वर्ष 2008 में सर्वाधिक 352 हत्याएं की गई थी। लेकिन बीते 14 वर्षों के अंदर यह ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है। 2010 के बाद जिले में हत्या की घटना में कमी होना शुरू हुआ। जो वर्ष 2017 तंक घटकर डेढ़ सौ के आंकड़ा तंक पहुंच गया। इसके बाद यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों के अंदर तीन अंकों से घटकर दो अंकों में पहुंचा।

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