एनडीपीसी के 515 पर्चों में से 122 में बयान एक जैसे भास्कर न्यूज | अमृतसर अपराधियों के खिलाफ भले ही अब बीएनएस की धाराओं का इस्तेमाल हो रहा है, मगर पुलिस की कहानी नहीं बदली है। बीएनएस की बंदिशों के बावजूद पुलिस पुराने ढर्रे पर ही केस दर्ज कर रही है। एनडीपीएस एक्ट के मामलों में अब भी पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर एक जैसे फैक्ट लिखकर केस दर्ज कर रही है। अधिकतर मामलों में पॉलीथिन से नशा बरामद होने और नाके के पास आरोपी के होने का जिक्र हो रहा है। जिला में नशा तस्करी के 1 जनवरी से अब तक 515 केस दर्ज हुए हैं। इनमें से 122 केस ऐसे हैं, जिनमें आरोपी नाके के पास पॉलीथिन फेंक कर भागने लगे। अधिकतर मामलों में पुलिस का एक ही बयान सामने आता है, जिसमें यह लिखा जाता है कि नाके के दौरान युवक को रुकने का इशारा किया, जो जेब से पॉलीथिन निकाल फेंककर भागने लगा, जिसे काबू किया और पॉलीथिन की जांच में नशा बरामद हुआ। शायद हो सकता है कि पुलिस ने किसी नशा तस्कर को पॉलीथिन के साथ काबू किया हो, जिसके बाद पुलिस ने इस पैटर्न से मामले दर्ज करने शुरू कर दिए । इसकी दूसरी वजह यह भी हो सकती है कि पुलिस जब भी रेड पर जाती है तो आने-जाने के समय को थाने में दर्ज किया जाता है। जिसके मुताबिक, पुलिस अपने थाने की हदबंदी से बाहर नहीं जा सकती। उसे दूसरे इलाके की पुलिस की मदद लेनी होती है। इस पूरे प्रकरण से बचने के लिए पुलिस नशा तस्करों की गिरफ्तारी को अपने थाने की हद में दिखा देती है। इसके लिए पुलिस पॉलीथिन की कहानी की मदद लेती है। लेकिन कोर्ट में चालान पेश होने पर कई वकील मोबाइल टॉवर की लोकेशन को पेश कर देते हैं। इसमें पुलिस के पर्चे में दर्ज जगह और मोबाइल टॉवर की लोकेशन अलग-अलग होती है। जिस वजह से आरोपी आसानी से छूट जाते हैं। -पंकज, एडवोकेट


