कोर्ट ने कहा-:मानसिक स्वास्थ्य जीवन के अधिकार का हिस्सा, योग्य डॉक्टर रखना सरकार की जिम्मेदारी

हाई कोर्ट के निर्देश पर स्वास्थ्य सचिव ने किया मेंटल हॉस्पिटल का निरीक्षण हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा है कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा हैं। लिहाजा सरकार का दायित्व है कि समय पर योग्य डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए। हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी सेंदरी स्थित स्टेट मेंटल हॉस्पिटल में डॉक्टरों की कमी की जानकारी होने पर दी। हाई कोर्ट ने माना कि सहायक कर्मचारी पर्याप्त हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों और मनोचिकित्सकों की कमी बड़ी चुनौती है। सेंदरी में प्रदेश का एकमात्र मेंटल हॉस्पिटल है। यहां मानसिक रोगियों के इलाज के लिए 2017 में बने अधिनियम के अनुसार प्रावधान और सुविधा नहीं होने पर हाई कोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी। हाई कोर्ट ने पूर्व में इस मामले पर स्वतः संज्ञान भी लिया था। दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई चल रही है। इस मामले पर हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को निरीक्षण कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। आदेश के परिपालन में स्वास्थ्य सचिव ने 11 अगस्त को सेंदरी के मेंटल हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। इस दौरान संचालक, स्वास्थ्य सेवाए, बिलासपुर कलेक्टर और एसएसपी भी मौजूद रहे। सचिव ने बताया कि मरीजों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को और आसान बनाने, ओपीडी में सुविधाएं बढ़ाने, दवाओं का भंडारण और लिस्टिंग में सुधार करने पर जोर दिया गया है। राज्य सरकार ने अस्पताल को नई सीटी स्कैन मशीन और पैथोलॉजी लैब के लिए आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया है। बता दें कि 27 मार्च 2024 को बेंगलुरु स्थित निमहंस की टीम ने भी हॉस्पिटल का निरीक्षण किया था, इसके बाद कई सुझाव दिए थे। सरकार ने तय किया है कि उन सुझावों को भी लागू किया जाएगा। बताया- कमियां दूर करने दिए निर्देश
निरीक्षण के बाद हाई कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत की, इसमें बताया कि हॉस्पिटल की कई कमियों को दूर करने और सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए हैं। लोक निर्माण विभाग को भवन की मरम्मत और शौचालयों के बाकी काम तुरंत पूरा करने को कहा गया है। वहीं, अस्पताल अधीक्षक को चौकीदार और चपरासी की भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए। कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड और रोस्टर के अनुसार समय पर उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। 10 हजार लोगों पर एक मनो चिकित्सक जरूरी
याचिका में बताया गया कि डब्ल्यूएचओ के नियम के मुताबिक 10 हजार लोगों पर 1 मनोचिकित्सक होना चाहिए, जबकि राज्य में 8 लाख लोगों पर एक है। प्रावधान के अनुसार हर जिले में एक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र और मनोचिकित्सक होना चाहिए। याचिका में यह भी बताया कि सेंदरी स्थित प्रदेश के एकमात्र मेंटल हॉस्पिटल के लिए 11 डॉक्टरों के पद स्वीकृत है, लेकिन उनमें से मात्र 3 पद पर ही मनो चिकित्सक नियुक्त हैं।

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