भास्कर न्यूज | अमृतसर मजीठा रोड के निजी अस्पताल की लापरवाही से हुई नवजात की मौत के मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों पर शनिवार को पीड़ितों और आरोपी अस्पताल के डॉक्टरों को दोबारा सिविल सर्जन कार्यालय में बुलाया गया। इसके साथ ही पीड़ित और आरोपी दोनों पक्षों के बयान दोबारा दर्ज किए गए हैं। इसके लिए 10 डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड गठित किया गया था। इसमें कार्डियोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट समेत अन्य डॉक्टर शामिल किए गए थे। मेडिकल बोर्ड की ओर से पीड़ितों की ओर से पेश की गई सभी टेस्ट और मेडिसिन की रिपोर्ट्स चेक की। इसके साथ ही उनसे सवाल भी पूछे कि वह कब निजी अस्पताल में पहुंचे थे और कब कब टेस्ट कराया। डिस्चार्ज होने के बाद कौन-कौन से अस्पताल गए। पूरा रिकॉर्ड डॉक्टरों ने चेक किया। उसके बाद अस्पताल के इंचार्ज समेत जिन डॉक्टरों पर आरोप लगे हैं, उनसे भी पूछताछ की। दरअसल 16 दिसंबर को पीड़ित पक्ष को सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से पीड़ित कशिश खन्ना और करन खन्ना को लेटर भेजा गया था कि 28 दिसंबर को दोबारा बयान दर्ज होने हैं। हालांकि इस मामले में पहले ही मेडिकल बोर्ड बनाकर रिपोर्ट पुलिस को सौंपी जा चुकी है, रिपोर्ट में मेडिकल एरर बताया गया था। लेकिन पीड़ितों ने हाईकोर्ट में केस कर दिया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने एरर शब्द को डिफाइन करने के लिए दोबारा मेडिकल बोर्ड बनाकर जांच करने को कहा। पुलिस ने हाईकोर्ट का लेटर सिविल सर्जन ऑफिस को फॉरवर्ड कर दिया। पीड़ितों ने कहा कि एक मोटरसाइकिल भी चोरी होती है, उसकी भी एफआईआर दर्ज हो जाती है। लेकिन 7 महीने बीतने के बाद भी उनके केस में एफआईआर दर्ज नहीं हो पा रही है। पीड़ितों ने कहा कि युवाओं को विदेश जाने के लिए हमारे सिस्टम ने मजबूर किया है। यहां लोगों को इसांफ तक नहीं मिलते। उन्होंने बेटी को हाथों से दफनाया और खुद दोनों पति पत्नी डिप्रेशन की दवाई खा रहे हैं, लेकिन हमारे डॉक्टर मुंह से तो नेगलिजेंस बोल रहे हैं लेकिन कागजों में उसे हेरफेर करके उसे एरर लिख रहे हैं। यह है मामला: दरअसल बसंत एवेन्यू निवासी कशिश खन्ना 8 साल बाद प्रेग्नेंट हुई थी। वह मजीठा रोड के पास अस्पताल में लगातार चेकअप करवा रहे थे। जुलाई 2023 से फरवरी 2024 तक उनका 8 बार अल्ट्रासाउंड करवाया गया। अस्पताल के डॉक्टर बेबी को हेल्दी बताते रहे। डिलीवरी के लिए मार्च का समय दिया गया था। लेकिन 12 फरवरी 2024 को उनका सिजेरियन केस कर दिया गया। जन्म के दौरान से ही बच्ची सही तरीके से सांस नहीं ले रही थी। वह अस्पताल को शिकायत करते रहे, लेकिन अस्पताल ने रिपोर्ट में सेटिसफेक्टरी डिस्चार्ज लिखकर उन्हें घर भेज दिया। अन्य निजी अस्पताल में चेकअप कराने पर पता चला था कि नवजात के दिल में मल्टीपल छेद हैं और इसमें दो सर्जरी होनी जरूरी है। अमृतसर से लुधियाना, दिल्ली तक 7 अस्पतालों में धक्के खाते लगभग 29 लाख खर्च होने के बाद 25 मई को उनकी बच्ची ने दम तोड़ दिया। सिविल सर्जन को शिकायत के बाद बनाए मेडिकल बोर्ड ने रिपोर्ट में मेडिकल एरर बताया था। पीड़ित कशिश खन्ना का आरोप था कि बोर्ड ने शब्दों में हेरफेर किया, यह एरर नहीं, पूरी तरह से नेगलिजेंस था। इसलिए वह हाईकोर्ट चले गए।


