सलूंबर जिला बरकरार:बांसवाड़ा संभाग खत्म, प्रतापगढ़-डूंगरपुर के साथ फिर उदयपुर में शामिल

प्रदेश की भाजपा नीत भजन सरकार ने पिछले साल कांग्रेस सरकार के बनाए 9 नए जिले और बांसवाड़ा समेत नए 3 संभाग रद्द कर दिए हैं। सलूंबर जिला बरकरार रखा गया है, जहां एक महीने पहले ही भाजपा ने महज 1285 वोट से उप चुनाव जीता था। प्रदेश में अब 7 संभाग और 41 जिले रह गए हैं। बांसवाड़ा संभाग खत्म करने के साथ अब 7 जिले (उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, सलूंबर के अलावा पहले की तरह बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़) उदयपुर संभाग का हिस्सा होंगे। बांसवाड़ा संभाग में बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ थे। मौजूदा सरकार ने गत 7 सितंबर को ही इस फैसले के संकेत दे दिए थे, जब बांसवाड़ा संभागीय आयुक्त के रूप में नियुक्त आईएएस नीरज के. पवन को हटाकर प्रज्ञा केवलरमानी को उदयपुर के साथ बांसवाड़ा संभाग का भी चार्ज दे दिया था। नीरज की नियुक्ति पिछले साल 7 अगस्त को हुई थी। जानकारों का ये भी कहना है कि यदि बांसवाड़ा संभाग को रखना ही होता तो संभव था कि संभागीय आयुक्त के तौर पर स्वतंत्र तौर पर आईएएस की नियुक्ति की जाती। फिलहाल भाजपा के जनप्रतिनिधि और नेता सरकार के फैसले का स्वागत कर रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस निर्णय को जन विरोधी बता रही है। माही डैम फिर से उदयपुर संभाग में, मानगढ़ धाम भी बांसवाड़ा संभाग बनने से पहले माही डैम को उदयपुर संभाग के सबसे बड़े बांध के रूप में जाना जाता था। संभाग बदलने के बाद माही डैम बांसवाड़ा में चला गया। आदिवासी समाज का तीर्थ मानगढ़ धाम भी फिर उदयपुर संभाग में आ गया। ऐसे ही उदयपुर संभाग की सीमाएं अब एमपी से ही लगती शुरू हो गई। क्योंकि बांसवाड़ा की अंतिम सीमा कुशलगढ़ और दानपुर से कुछ दूरी पर एमपी शुरू हो जाता है। दाऊदी बोहरा समुदाय की पीर दरगाह गलियाकोट भी वापस उदयपुर संभाग में रहेगा। बता दें, नए संभाग की घोषणा से पहले बांसवाड़ा-डूंगरपुर समेत उदयपुर में 6 जिले थे। चुनौती ये भी थी… संभाग बनाए रखते तो 1 हजार करोड़ का भार
विशेषज्ञों की राय में सरकार कोई संभाग स्थापित करती है तो उसके लिए कम से कम एक हजार करोड़ रुपए चाहिए। क्योंकि करीब 54 विभाग ऐसे होते हैं, जिनके संभाग स्तर पर अधिकारी होते हैं। पद सृजित करने के साथ इनके दफ्तर-इन्फ्रास्ट्रक्चर, वेतन-भत्तों आदि के लिए बड़ा फंड चाहिए। हालांकि बांसवाड़ा में दफ्तरों के लिए जमीनों के आवंटन लेकर प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। कई बड़ी कंपनियों की स्थापना का कदम भी बढ़ाया जा चुका था। प्रॉपर्टी और रियल एस्टेट में आया बूम इसका प्रमाण है, लेकिन अब इन तैयारियों को झटका लगा है। प्रशासनिक स्तर पर संभागीय आयुक्त और आईजी के सृजित हो चुके थे, जो अब हट जाएंगे।

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