शहर की सड़कों पर बढ़ते आवारा पशुओं की संख्या एक गंभीर समस्या बन गई है, जो अक्सर हादसों का कारण बनती है। इस स्थिति के लिए प्रशासन की नाकामी और कुछ हद तक शहर के नागरिक भी जिम्मेदार हैं। कई लोग सड़कों के बीचों-बीच पशुओं को चारा खिलाते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। जब कोई हादसा होता है, तो ये लोग पशुओं की समस्या पर शोर मचाते हैं, लेकिन दूसरों को होने वाली परेशानी पर चुप रहते हैं। जरूरत है कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इन आवारा पशुओं को सड़कों से हटाए और उनके मालिकों पर जुर्माना लगाए। साथ ही, उन लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जो सार्वजनिक सड़कों पर चारा डालकर दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं। ऐसे लोगों को पशुओं के लिए बने विशेष स्थलों पर जाकर चारा डालने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। केवल तभी इस समस्या का समाधान हो पाएगा।


